छत्तीसगढ़ के रायपुर जेल में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को भेजा जाएगा उनके देश

छत्तीसगढ़ के रायपुर जेल में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को भेजा जाएगा उनके देश

छत्तीसगढ़ के रायपुर जेल में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को भेजा जाएगा उनके देश
Modified Date: June 19, 2026 / 05:41 pm IST
Published Date: June 19, 2026 5:41 pm IST

बिलासपुर, 19 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायपुर जेल में बंद उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को उनके देश वापस भेजने का रास्ता साफ कर दिया है।

न्यायालय के सूत्रों ने बताया कि उच्च न्यायालय ने उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिकों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण करते हुए कहा है कि चूंकि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही उन्हें, उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया में हैं इसलिए मामले में आगे किसी न्यायिक निर्णय की आवश्यकता नहीं रह गई है।

उन्होंने बताया कि उज़्बेकिस्तान की दो महिलाओं– फेरुज़ा साबिरोवा और दिनोरा सफ्युत्दीनोवा ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कहा कि उन्हें रायपुर पुलिस ने नौ जनवरी 2026 से हिरासत में लिया तथा उन्हें 14 जनवरी 2026 से रायपुर केंद्रीय जेल के ‘निरूद्ध केंद्र’ में रखा गया है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि फेरुज़ा साबिरोवा का पासपोर्ट और वीजा गुम हो गया है तथा दिनोरा सफ्युत्दीनोवा का पासपोर्ट वैध है लेकिन उसका वीजा 16 मई 2025 से समाप्त हो चुका है।

रायपुर पुलिस ने 12 मार्च 2026 को दोनों के खिलाफ अप्रवास और विदेशी अधिनियम, 2025 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया था।

सूत्रों ने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उनके परिवार के सदस्य उनके उज़्बेकिस्तान लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक याचिकाकर्ता निम्न आय वर्ग से हैं तथा अपने रिश्तेदारों से मिलने और पर्यटक के रूप में भारत आई थीं।

सूत्रों के अनुसार दोनों का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है और उनके विरुद्ध कोई आपराधिक या सिविल मामला लंबित नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा उज़्बेकिस्तान दूतावास उन्हें उज़्बेकिस्तान भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता भारत में अवैध रूप से रुकी हुई थीं, जिसके लिए उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई क्योंकि यह संज्ञेय अपराध है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि उन्हें 26 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया तथा इसकी सूचना उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ उज़्बेकिस्तान दूतावास, नई दिल्ली तथा गृह मंत्रालय को भी दी गई।

राज्य सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को 26 अप्रैल 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया तथा इस अदालत ने याचिकाकर्ताओं को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था और उन्हें केंद्रीय जेल, रायपुर में रखा गया है।

राज्य सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता बिना वैध पासपोर्ट और वीजा के भारत में रह रही थीं, इसलिए उनकी हिरासत को अवैध नहीं कहा जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगल पीठ में मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं ने बताया कि याचिकाकर्ताओं को बहुत जल्द उज़्बेकिस्तान भेजा जाएगा।

न्यायालय में बताया गया कि उज़्बेकिस्तान दूतावास से 25 मई 2026 को संदेश मिला जिसमें भारत में उज़्बेकिस्तान गणराज्य दूतावास ने इस न्यायालय से अनुरोध किया है कि याचिकाकर्ताओं के संबंध में त्वरित निर्वासन का आदेश पारित किया जाए और दूतावास ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह आवश्यक दस्तावेज जारी करने और उसकी व्यवस्था करने के लिए तैयार है।

उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को अपने आदेश में यह कहते याचिका को निस्तारित कर दिया कि ‘चूंकि केंद्र और राज्य सरकार, दोनों का ही याचिकाकर्ताओं को उनके देश भेजने का प्रस्ताव है, इसलिए इस याचिका में निर्णयन के लिए कुछ शेष नहीं बचता।’

भाषा सं संजीव

राजकुमार

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