विरोध के भंवर में बोधघाट! आखिर अरविंद नेताम क्यों कर रहे परियोजना का विरोध?
विरोध के भंवर में बोधघाट! आखिर अरविंद नेताम क्यों कर रहे परियोजना का विरोध?
रायपुरः केंद्रीय जल आयोग से मंजूरी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार बरसों से अधूरी पड़ी बोधघाट परियोजना का सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार करने में जुटी है, तो दूसरी ओर आदिवासी नेता अरविंद नेताम परियोजना के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निशाना साधते हुए कहा कि परियोजना का विरोध करें उन्हें कोई नहीं रोक रहा। दोनों नेताओं के बीच जारी जुबानी जंग में अब बीजेपी की भी एंट्री हो चुकी है। ऐसे में सवाल है कि अरविंद नेताम की मोर्चाबंदी का बोधघाट परियोजना पर क्या असर पड़ेगा? क्या इसके कोई सियासी मायने हैं? सवाल ये भी कि पिछले 41 साल से अटके पड़े बोधघाट को लेकर विवाद कब थमेगा?
बस्तर में बोधघाट परियोजना के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे आदिवासी नेता अरविंद नेताम पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमकर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने आक्रामक रूख अपनाते हुए कहा कि पेट्रोल पंप से लेकर तमाम आर्थिक संसाधन जुटाने के बाद अरविंद नेताम को विरोध की सियासत पसंद आ रही है। सीएम के आक्रामक अंदाज पर अरविंद नेताम ने कुछ दिन तो चुप्पी साधी, लेकिन शनिवार को सर्व आदिवासी समाज के भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अरविंद नेताम ने सीएम के आरोपों का जवाब दिया। साथ ही ये भी ऐलान कर दिया कि बोधघाट परियोजना को लेकर उनका विरोध स्थानीय लोगों के साथ जारी रहेगा।
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अरविंद नेताम के बयान पर सीएम भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि वो विरोध करें उन्हें किसने रोका है? साथ ही उन्होंने दोहराया कि मैंने गलत क्या बोला है, क्या आदिवासियों को सक्षम नहीं होना चाहिए? जैसे अरविंद नेताम हैं, दीपक बैज हैं, इसमें नाराज होने वाली क्या बात है? इधर बीजेपी ने कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए बयानबाजी हो रही है।
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ये पहला मौका नहीं है जब अरविंद नेताम ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। इससे पहले भी बस्तर में आदिवासी देवी-देवताओं के विस्थापन को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं अरविंद नेताम। बहरहाल सवाल ये है कि आखिर बोधघाट परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं अरविंद नेताम? उनके इस कदम से क्या आने वाले दिनों मे मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार को सर्व आदिवासी समाज के एक धड़े का विरोध का सामना करना पड़ेगा? सवाल ये भी कि क्या बीते 41 साल से अधर में अटका बोधघाट परियोजना विरोध के भंवर में ही फंसकर रह जाएगा?
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