इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की परीक्षा पद्धति-PhD के प्रावधानों में संशोधन, इस आधार पर होगा मूल्यांकन

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की परीक्षा पद्धति-PhD के प्रावधानों में संशोधन, इस आधार पर होगा मूल्यांकन

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  • Publish Date - July 4, 2020 / 04:38 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:58 PM IST

रायपुर: राज्यपाल एवं कुलाधिपति अनुसुईया उइके के अनुमोदन के बाद कोविड-19 महामारी के प्रभाव को देखते हुए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की परीक्षा पद्धति और पीएच.डी. के प्रावधानों में संशोधन किया गया है। यह संशोधन अध्यादेश क्रमांक-18 एवं अध्यादेश क्रमांक-60 में किया गया है। इसके अनुसार अंतिम वर्ष सेमेस्टर पाठ्यक्रम को छोड़कर स्नातक (यू.जी.)/स्नातकोत्तर (पी.जी) एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के सभी मध्यवर्ती सेमेस्टर और वर्ष के अंत के परीक्षाओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों द्वारा निर्धारित किए गए मूल्यांकन पद्धति के आधार पर किया जाएगा। राज्यपाल ने निर्देशित किया है कि विद्यार्थियों को परीक्षा एवं अन्य संबंधित गतिविधियों के संचालन के बारे में कम से कम 15 दिवस पहले सूचित किया जाए। जिन विद्यार्थियों की पीएच.डी. थीसिस की समय-सीमा समाप्त हो गई है या कोरोना महामारी की अवधि के दौरान समाप्त हो रही है, उन्हें थीसिस प्रस्तुत करने की निर्धारित तारीख से छह माह की अनुमति दी जाए।

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यह प्रावधान यू.जी., पी.जी. एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष, अंतिम सेमेस्टर और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सभी अमहाविद्यालयीन परीक्षाओं पर लागू नहीं होंगे। इनके लिए परीक्षा आयोजन का निर्णय कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों के आधार पर लिया जाएगा।

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इन संशोधनों के अनुसार 14 मार्च 2020 से पहले आयोजित सभी परीक्षाओं का मूल्यांकन अध्यादेशों में निर्धारित मापदण्ड/प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अंतिम वर्ष/सेमेस्टर पाठ्यक्रम को छोड़कर वर्ष 2019-20 के स्नातक (यू.जी.), स्नातकोत्तर (पी.जी.) एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के अन्य सभी मध्यवर्ती सेमेस्टर और वर्ष के अंत की परीक्षाओं का मूल्यांकन, विश्वविद्यालय-महाविद्यालय द्वारा किये गए आंतरिक मूल्यांकन में छात्र द्वारा प्राप्त 50 प्रतिशत ग्रेडिंग अंक और शेष 50 प्रतिशत अंक पिछले सेमेस्टर या वर्ष में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। यदि, जहां पिछले सत्र में विषय उपलब्ध नहीं है, तो वर्तमान सत्र के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर 100 प्रतिशत मूल्यांकन किया जायेगा। कोई छात्र ग्रेड या अंकों में सुधार करना चाहे, तो वह अगले सेमेस्टर-वर्ष के दौरान ऐसे विषयों के लिए विशेष परीक्षा में उपस्थित हो सकता है या वह विश्लेषण के बाद विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किया गया कोई अन्य अवसर में शामिल हो सकता है। अंतिम सेमेस्टर का कोई भी छात्र किसी सेमेस्टर में बैक होने की स्थिति में उसका मूल्यांकन विशेष प्रावधान के खंड-4 के अनुसार किया जाएगा।

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विद्यार्थियों की उपस्थिति के संबंध में यह माना गया है कि न्यूनतम प्रतिशत उपस्थिति की आवश्यकता होने पर लॉकडाउन की अवधि को सभी छात्रों की उपस्थिति माना जाएगा। कोविड-19 महामारी के मद्देनजर वर्तमान शैक्षणिक सत्र के परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, विशेष उपबंधों के तहत स्वचालित रूप से रद्द कर दिया जाएगा।

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कोविड-19 महामारी के प्रभाव के परिणाम स्वरूप पीएच.डी. से संबंधित प्रावधानों में अनुमोदन के अनुसार संशोधन किया गया है। यह संशोधन अध्यादेश क्रमांक-60 से संबंधित है। इसके अनुसार पीएच.डी. चिरायु-स्वर परीक्षाएं वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएगी। पीएच.डी. डिग्री के लिए वीडियो कॉफ्रेसिंग के माध्यम से वायवा-वायस परीक्षा आयोजित करते समय अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्यों, विभाग के सभी संकाय सदस्यों, अनुसंधान विद्वानों एवं अन्य विशेषज्ञ/शोधकर्ताओं द्वारा भाग लिया जाएगा। सभी के नियत रिकार्ड, जिसमें विशेषज्ञ द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट शामिल है, उसी को परीक्षा संचालित करने के लिए परीक्षक नियुक्त किया जाएगा। अनुसंधान विद्वानों के लिए न्यूनतम उपस्थिति के संबंध में लॉकडाउन की अवधि को भी न्यूनतम प्रतिशत माना जाएगा।

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