उत्तराखंड में 13 हिमनद झीलें संवेदनशील, धामी ने झीलों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए
उत्तराखंड में 13 हिमनद झीलें संवेदनशील, धामी ने झीलों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए
देहरादून, 27 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में 13 हिमनद झीलों के संवेदनशील श्रेणी में चिह्नित किए जाने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को पहाड़ी क्षेत्रों में हिमनद झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए उनकी नियमित निगरानी तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए।
प्रदेश के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को दिए निर्देशों में मुख्यमंत्री ने हिमनद झीलों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ स्थापित करने तथा आवश्यकतानुसार इनकी संख्या बढ़ाने को कहा है।
धामी ने कहा कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील हिमनद झीलों का व्यापक सर्वेंक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए जिसके तहत झीलों की स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम क्षेत्रों का नियमित आकलन किया जाए।
उन्होंने कहा कि संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली एवं अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत करने के भी निर्देश दिए।
इस बीच, मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग की राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला तथा लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) रघुवीर सिंह भंडारी द्वारा नेपाल में आयी आपदा के मद्देनजर उत्तराखंड में ऐसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गयी।
बैठक में तैयारियों की समीक्षा के साथ ही जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अपने-अपने जिलों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें तथा किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तत्काल उच्च स्तर पर उपलब्ध कराएं।
आपदा प्रबंधन सचिव सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 हिमनद झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित की गई हैं जिनमें से चार का सर्वेक्षण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा।
सुमन ने बताया कि जल्द ही चमोली जिले में स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल का सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल रवाना किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को भी संभावित खतरों एवं आपदा के समय अपनाई जाने वाली सुरक्षित प्रक्रियाओं के संबंध में जागरूक किया जाएगा।
भाषा दीप्ति शफीक
शफीक

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