व्हाट्सऐप पर ‘बॉस’ बनकर 5.30 करोड़ रुपये की चपत लगाई, 17 साइबर ठग गिरफ्तार

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व्हाट्सऐप पर ‘बॉस’ बनकर 5.30 करोड़ रुपये की चपत लगाई, 17 साइबर ठग गिरफ्तार

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  • Publish Date - May 2, 2026 / 08:08 PM IST,
    Updated On - May 2, 2026 / 08:08 PM IST

जयपुर, दो मई (भाषा) राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराधियों के बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 17 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने व्हाट्सऐप पर कथित तौर पर एक कंपनी के चेयरमैन की तस्वीर और नाम लगाकर अकाउंटेंट को झांसे में लिया तथा पांच करोड़ 30 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा करा लिए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पुलिस उपमहानिरीक्षक (साइबर अपराध) शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में अकाउंटेंट दीपेन्द्र सिंह ने 24 अप्रैल 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के अनुसार, दीपेन्द्र सिंह को कंपनी मालिक के नाम और फोटो वाले दूसरे व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला जिसमें दो अलग-अलग बैंक खातों में तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए गए। भरोसा कर उसने 5.30 करोड़ रुपये जमा कर दिए। बाद में यह साइबर ठगी निकली।

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस अधीक्षक (साइबर अपराध) सुमित मेहरडा की निगरानी में विशेष टीमों ने बैंक खातों की तकनीकी जांच की, जिसमें पता चला कि ठगी की रकम कई बैंक खातों में घुमाई गई और बाद में नकद निकासी ‘यूएसडीटी’ तथा हवाला के जरिए इसे ठिकाने लगाया गया।

पुलिस ने जिला पुलिस कोटा ग्रामीण, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर और बाड़मेर जिला पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, नकद निकासी करने वाले, कमीशन एजेंट और क्रिप्टोकरंसी के जरिए राशि अंतरित करने वाले लोग शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कोटा निवासी सोहेल खान, मोहम्मद राशिद, समीर, तोहिद मोहम्मद, नवीन सिंह चौहान, बांसवाड़ा निवासी अविनाश जैन, प्रवीण रावल, अमित रावल, भव्य गिरि, मुकेश चौहान, जोधपुर निवासी घनश्याम धतरवाल, राहुल, कमलेश, पाली निवासी दीपेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र, हरीश और बाड़मेर निवासी सदराम के रूप में हुई है।

पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों में वकालत का छात्र, सैलून कर्मी और वाहनों के कलपुर्जे बेचने वाला दुकानदार तक शामिल हैं।

इसने कहा कि ये आरोपी बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक और डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने, नकद निकासी और कमीशन के बंटवारे के लिए चाय की दुकानों या थड़ियों पर मिलते थे ताकि किसी को संदेह न हो।

भाषा पृथ्वी राजकुमार नेत्रपाल

नेत्रपाल