इंफाल, तीन सितंबर (भाषा) मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में बताया कि मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं।
मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच यह हिंसा तीन मई 2023 को तब शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ निकाला गया था। यह मार्च मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था।
विधानसभा के मौजूदा सत्र के दूसरे दिन भाजपा विधायक सपम रंजन सिंह के सवाल के जवाब में कोंथौजम ने कहा, ‘‘तीन मई 2023 को हिंसा शुरू होने के बाद से 31 अगस्त 2026 तक 306 लोगों की मौत हुई है और 49 लोग अब भी लापता हैं।’’
मेइती समुदाय की आबादी मणिपुर की कुल आबादी का करीब 53 प्रतिशत है और यह मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहती है। वहीं, राज्य में नगा और कुकी समेत आदिवासी समुदाय की आबादी करीब 40 प्रतिशत है और ये मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
हिंसा को देखते हुए पिछले साल 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। इससे पहले महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद भाजपा नीत सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने नौ फरवरी को इस्तीफा दे दिया था।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था।
इस साल चार फरवरी को राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया। इसके कुछ घंटे बाद भाजपा नेता वाई. खेमचंद सिंह के मुख्यमंत्री बनने के साथ राज्य में नयी सरकार का गठन हुआ।
भाषा शोभना वैभव
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