नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह ताजमहल के आसपास के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में प्रदूषणरहित सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की स्थापना से संबंधित लंबित आवेदनों पर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) के परामर्श से कार्रवाई करे।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि एमएसएमई स्थापित करने के प्रस्तावों पर संचयी प्रभाव आकलन (सीआईए) रिपोर्ट टीटीजेड प्राधिकरण को सौंप दी गई है।
पीठ ने निर्देश दिया कि प्रदूषणरहित उद्योग स्थापित करने की अर्जियों पर विचार करते समय टीटीजेड प्राधिकरण शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त सीईसी और एनईईआरआई को प्रक्रिया में शामिल करे।
पीठ ने कहा, ‘‘यह कहने की जरूरत नहीं है कि उद्योग स्थापित करने संबंधी अर्जियों की जांच 23 जुलाई, 2026 के हमारे आदेश के अनुरूप की जाएगी।’’
पीठ ने 23 जुलाई को ताजमहल के आसपास के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में प्रदूषणरहित एमएसएमई स्थापित करने की करीब 400 लंबित अर्जियों पर कार्रवाई करने की अनुमति टीटीजेड प्राधिकरण को दी थी।
न्यायालय ने तब निर्देश दिया था कि प्रत्येक प्रस्ताव की सीईसी और एनईईआरआई के विशेषज्ञों से जांच कराई जाए। किसी प्रस्ताव पर आपत्ति होने की स्थिति में संबंधित आवेदन को न्यायालय की अनुमति के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पीठ 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैले टीटीजेड में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले की सुनवाई कर रही है। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए न्यायालय ने 1996 से इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं।
अदालत ने कहा कि टीटीजेड से संबंधित दृष्टि दस्तावेज, संचयी प्रभाव आकलन और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा पर एनईईआरआई की अंतिम रिपोर्ट जैसे कुछ महत्वपूर्ण अध्ययन अभी लंबित हैं, लेकिन इनके लंबित रहने से टीटीजेड प्राधिकरण के पास पहले से प्राप्त अर्जियों पर विचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
भाषा
योगेश अजय
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