(तस्वीरों के साथ)
गुवाहाटी, नौ अप्रैल (भाषा) असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान बृहस्पतिवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया, जिसमें रिकॉर्ड 85.21 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि 2021 में असम में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में 82.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
उन्होंने बताया कि मतदान प्रतिशत में और वृद्धि की संभावना है, क्योंकि जो लोग शाम पांच बजे से पहले मतदान केंद्र में प्रवेश कर चुके थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भारी मतदान को “सामान्य नहीं, बल्कि ऐतिहासिक” बताया।
अधिकारियों के मुताबिक, 16 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 90 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि इनमें से ज्यादातर विधानसभा क्षेत्र अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में स्थित हैं।
अधिकारियों के अनुसार, 83 विधानसभा क्षेत्रों में 80-89 फीसदी, जबकि बाकी क्षेत्रों में 70-79 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
उन्होंने बताया कि दलगांव में सबसे अधिक 95.53 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि सबसे कम 72.05 फीसदी मतदान न्यू गुवाहाटी में दर्ज किया गया।
असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में कुल 2.50 करोड़ लोग मतदान के लिए पात्र थे, जिनमें 1.25 करोड़ महिलाएं और 318 तीसरे लिंग के मतादाता शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि असम के 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक वोट डाले गए। राज्य में मतगणना चार मई को होगी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिशों में जुटा है। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस राज्य में एक दशक पहले गंवाई गई सत्ता को वापस पाने का प्रयास कर रही है।
हिमंत ने भारी मतदान को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि चुनाव परिणाम “हमारे लोगों के चेहरों पर आशा, गर्व और खुशी के रूप में पहले से ही दिखाई दे रहा है।”
मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “हमारा उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं था, बल्कि इसे एक आंदोलन में बदलना था-एक ऐसा आंदोलन, जो हमारे सभ्यतागत मूल्यों, हमारी संस्कृति और हमारी भूमि की रक्षा करे।”
उन्होंने लिखा, “आज पहली बार हमारे लोग अभूतपूर्व संख्या में मतदान करने निकले-कंधे से कंधा मिलाकर वोट डाला और मतदान प्रतिशत के मामले में हमारे विरोधियों के बराबर रहे या उनसे भी आगे निकल गए। कई मतदान केंद्रों पर मतदान 95 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। यह सामान्य नहीं है। यह ऐतिहासिक है।”
हिमंत ने कहा कि असम भाषा और जाति से ऊपर उठ गया है तथा “हमारे लोगों ने हमारी भूमि, हमारी पहचान और हमारी संस्कृति को अवैध घुसपैठ तथा जनसांख्यिकीय आक्रामकता से बचाने के लिए एक स्पष्ट संकल्प के साथ मतदान किया है।”
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक चुनाव नहीं है। यह असम के इतिहास में एक अहम मोड़ है।”
हिमंत ने कहा कि संदेश स्पष्ट है : “असम आत्मसमर्पण नहीं करेगा, असम लड़ेगा, असम अपना अस्तित्व बनाए रखेगा, असम डटा रहेगा।”
कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने एक बयान में राज्य में “परिवर्तन” के लिए अभूतपूर्व संख्या में मतदान करने के लिए लोगों का आभार जताया।
गोगोई ने कहा कि असम की जनता ने “नये बोर-असम” और नये नेतृत्व की उम्मीद में मतदान किया।
उन्होंने कहा, “अब निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वह ईवीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करे और चार मई को सटीक मतगणना कराए।”
भाषा पारुल माधव
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