भारत में कैंसर उपचार के बाद 94.5 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ: अध्ययन

भारत में कैंसर उपचार के बाद 94.5 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ: अध्ययन

भारत में कैंसर उपचार के बाद 94.5 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ: अध्ययन
Modified Date: February 21, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: February 21, 2026 8:03 pm IST

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) भारत में बच्चों में कैंसर के उपचार को लेकर किए गए अपनी तरह के पहले अध्ययन में बीमारी के इलाज के पश्चात 94.5 प्रतिशत बच्चों में पांच साल की बचाव दर पाई गई। इसका मतलब है कि इलाज के बाद ऐसे बच्चे पांच साल बाद भी जीवित रहे। इसके अलावा ऐसे बच्चों में संबंधित जटलिता दोबारा न होने की दर लगभग 90 प्रतिशत रही।

संबंधित अध्ययन रिपोर्ट ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया’ पत्रिका में प्रकाशित हुई है।

अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि 2016 में शुरू किया गया ‘इंडियन चाइल्डहुड कैंसर सर्वाइवरशिप’ (सी2एस) अध्ययन, सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र से दुनिया के पहले अध्ययनों में से एक है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र, नयी दिल्ली के अनुसंधानकर्ताओं सहित टीम ने देश भर के 20 केंद्रों से 18 वर्ष की आयु से पहले कैंसर से पीड़ित और उपचार के बाद रोगमुक्त हो चुके 5,419 बच्चों का अध्ययन किया।

अध्ययन के अनुसार, संबंधित बच्चों में ‘एक्यूट ल्यूकेमिया’ सबसे आम कैंसर (40.9 प्रतिशत) पाया गया। सामान्य चिकित्सीय रणनीतियों में 94.7 प्रतिशत प्रतिभागियों के लिए कीमोथेरेपी, 30 प्रतिशत के लिए सर्जरी और 26.3 प्रतिशत के लिए रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ी।

अनुसंधानकर्ताओं ने लिखा, ‘‘संपूर्ण समूह के लिए 5-वर्षीय समग्र उत्तरजीविता (ओएस) और रोग-मुक्त उत्तरजीविता (ईएफएस) दरें क्रमशः 94.5 प्रतिशत और 89.9 प्रतिशत रहीं।’’

पांच साल की समग्र उत्तरजीविता दर उन रोगियों का प्रतिशत है जो प्रारंभिक निदान या उपचार शुरू होने के पांच साल बाद जीवित रहते हैं, जबकि घटना-मुक्त उत्तरजीविता दर उन रोगियों की संख्या है जो कैंसर का प्राथमिक उपचार समाप्त होने के बाद कुछ जटिलताओं से मुक्त रहते हैं।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव


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