बेंगलुरु, दो सितंबर (भाषा) बेंगलुरु में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक अधिकारी के नाम से कथित तौर पर फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाकर विभिन्न बहानों से लोगों से पैसे ऐंठने के आरोप में राजस्थान के एक नाबालिग को पकड़ा गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी ने आईपीएस अधिकारी नारायण एम. के नाम से फर्जी अकाउंट बनाया था, जो फिलहाल बेंगलुरु में पुलिस उपायुक्त (इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन) के पद पर तैनात हैं।
पुलिस ने नाबालिग के पास से दो लाख रुपये नकद बरामद किए हैं, जो कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों के जरिए धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम का हिस्सा थे।
उसने बताया कि मामला सामने आने के बाद आईपीएस अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाने के संबंध में हेब्बागोडी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी इस फर्जी अकाउंट के जरिए अधिकारी के परिचितों और आम जनता को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजता था और बाद में उनसे तरह-तरह के बहाने बनाकर पैसे वसूलता था।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने गहन पूछताछ की और राजस्थान के कोटा खुर्द गांव से संचालित हो रहे एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
उन्होंने बताया कि 24 अगस्त को पुलिस ने इस अपराध में कथित तौर पर शामिल नाबालिग के माता-पिता को नोटिस जारी किया और पूछताछ के लिए उसे हिरासत में ले लिया।
अधिकारी ने कहा, ‘पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि उसने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया था। उसने बताया कि उन्होंने देश भर के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम पर फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाए थे और उनका प्रतिरूपण कर पैसे ऐंठ रहे थे।’
उन्होंने बताया कि जांच से पता चला है कि जालसाज इन फर्जी खातों का इस्तेमाल कर यह दावा करते थे कि उनका एक दोस्त सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) का कमांडेंट है, जिसका तबादला हो गया है और इसलिए वह कम कीमतों पर फर्नीचर व घरेलू सामान बेच रहा है।
अधिकारी ने कहा, ‘लोगों को इन दावों पर विश्वास दिलाकर और सामान खरीदने का झांसा देकर, वे उनसे पैसे ऐंठते थे और ठगी करते थे।’
पुलिस ने कहा कि इस मामले में कई अन्य लोगों के शामिल होने का संदेह है और उनकी तलाश जारी है।
नाबालिग को 25 अगस्त को देवनहल्ली के एक बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
भाषा सुमित मनीषा
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