मारपीट और जबरन वसूली मामले में ‘आप’ नेता चैतर वसावा की पत्नी, चार अन्य को जमानत

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मारपीट और जबरन वसूली मामले में ‘आप’ नेता चैतर वसावा की पत्नी, चार अन्य को जमानत

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 08:38 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 08:38 PM IST

अहमदाबाद, 22 जुलाई (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने मारपीट और जबरन वसूली से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता चैतर वसावा की पत्नी सहित पांच दोषियों को बुधवार को यह कहते हुए जमानत दे दी कि प्रथम दृश्टया इन लोगों के खिलाफ किसी प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य का आरोप नहीं था, क्योंकि इनकी भूमिका सीमित थी।

पिछले महीने एक सत्र अदालत ने वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला देवी और सात अन्य लोगों को नवंबर 2023 के उस मामले में सात-सात साल की जेल की सजा सुनाई थी, जिसमें उनपर वन अधिकारियों के साथ मारपीट करने और जबरन वसूली का आरोप था।

अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

न्यायमूर्ति वीके व्यास की एकल पीठ ने शकुंतला देवी, रमेश वसावा, मरियम वसावा, बलिराम वसावा और मोगराबेन वसावा की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

पीठ ने कहा कि ये लोग मुख्य आरोपी नहीं थे और इनके खिलाफ किसी प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य का आरोप भी नहीं था। उसने कहा कि इन लोगों को ‘विकैरियस लायबिलिटी’ (दूसरों के कृत्य के लिए कानूनी जिम्मेदारी) के आधार पर सजा सुनाई गई थी।

पीठ ने कहा कि 2023 में हुए अपराध में याचिकाकर्ताओं की भूमिका “सीमित” थी, क्योंकि उन्होंने शिकायतकर्ता और गवाह को कोई शारीरिक चोट नहीं पहुंचाई थी, बल्कि उन्हें सिर्फ अपशब्द कहे थे।

पीठ ने प्रत्येक याचिकाकर्ता को 15-15 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार पर सशर्त जमानत दे दी।

पीठ ने स्पष्ट किया कि पांचों दोषी किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेंगे।

गुजरात उच्च न्यायालय ने दो जुलाई को आरोपी बलिराम की पत्नी शकुंतलाबेन वसावा की जमानत याचिका मंजूर कर ली थी। शकुंतलाबेन ने बच्चे को जन्म देने के बाद मानवीय आधार पर जमानत मांगी थी।

उच्च न्यायालय अब तक छह दोषियों की सजा पर रोक लगाने के अनुरोध वाली याचिकाएं स्वीकार कर चुका है।

चैतर वसावा और चार अन्य दोषियों ने अभी तक अपनी सजा पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख नहीं किया है।

चैतर वसावा फिलहाल नर्मदा केंद्रीय कारागार में बंद हैं।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश