Sonam Wangchuk Agenda for Protest: नीट पेपर लीक नहीं FCRA संशोधन विधेयक है सोनम वांगचुक का असली मुद्दा? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच आई बड़ी खबर

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Sonam Wangchuk Agenda for Protest: नीट पेपर लीक नहीं FCRA संशोधन विधेयक है सोनम वांगचुक का असली मुद्दा? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच आई बड़ी खबर

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  • Publish Date - July 23, 2026 / 04:26 PM IST,
    Updated On - July 23, 2026 / 04:27 PM IST

Sonam Wangchuk Agenda for Protest: नीट पेपर लीक नहीं FCRA संशोधन विधेयक है सोनम वांगचुक का असली मुद्दा? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच आई बड़ी खबर / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं
  • वायरल वीडियो में FCRA और जॉर्ज सोरोस से जुड़े कई दावे किए गए
  • केंद्र सरकार ने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की

नई दिल्ली: Sonam Wangchuk Agenda for Protest नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन लगातार जारी है। बीते दिनों कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद भवन तक पैदल मार्च किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई। हालांकि इस दौरान कुछ प्रदर्शन ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे तो कुछ लोग अपनी अलग ही राग अलापते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान हुई ऐसी घटनाओं का कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। दूसरी ओर 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से हटाकर जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था। वहीं, कुछ इंफ्लुएंसर ये सवाल उठाने लगे हैं कि वांगचुक का असली मुद्दा नीट पेपर लीक नहीं बल्कि FCRA संशोधन बिल है जिसे सरकार मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश करने वाली है। तो चलिए जानते हैं क्या है जंतर-मंतर में हो रहे प्रदर्शन का असली मकसद क्या है?

सोनम वांगचुक का मुद्दा नीट पेपर लीक नहीं?

Sonam Wangchuk Agenda for Protest दरसअल अभिषेक कर नाम के इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया है कि ”आपको सोनम वांगचुक और जॉर्ज सोरोस का कनेक्शन है या नहीं तो आपको FCRA लॉ को समझना पड़ेगा। FCRA वो संस्था है तो ये तय करती है कि कोई एनजीओ विदेश से कैसे पैसा ला सकती है और उसे खर्च किन कामों में कर सकती है। जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन पर सरकार ने पहले ही FCRA प्रतिबंध लगा दिया है। दूसरी ओर ईडी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि इस संस्था को एफडीआई और अन्य माध्यम से विदेशी फंडिंग मिल रही है। हालांकि मामले में फिलहाल जांच जारी है, लेकिन ओएफसी ने दावा किया है कि उनके सभी कार्यकलाप सही है और लीगल है।”

2025 में रद्द कर दिया गया था लाइसेंस

अभिषेक कर ने अपने वीडियो में आगे कहा कि ”दूसरी तरफ सोनम वांगचुक के एनजीओ SECMOL का FCRA लाइसेंस भी भारत सरकार ने साल 2025 में रद्द कर दिया है। आरोप है कि एनजीओ के लिए विदेशी फंडिंग से संबंधित कानून का ‘बार-बार’ उल्लंघन किया गया। हालांकि वांगचुके ने कहा था कि राजनीतिक तरीके से मेरे एनजीओ का FCRA लाइसेंस रद्द किया गया है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान सोनम ने छात्रों को नीट परीक्षा के साथ-साथ FCRA के संबंध जानकारी दी। इससे ये स्पष्ट होता है कि सोनम और जॉर्ज सोरोस के बीच डायरेक्ट कनेक्शन तो नहीं है, लेकिन दोनों का मुद्दा एक ही है।”

 

क्या है विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक

संसद में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक (FCRA) पर चर्चा से पहले सरकार ने सफाई दी है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि विदेशी फंडिंग और प्रभाव को रेगुलेट करना सिर्फ भारत का तरीका नहीं है, बल्कि अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे प्रमुख लोकतांत्रिक देश भी पिछले दशक में ऐसे कानूनों को मजबूत कर चुके हैं। MHA ने एक जानकारी जारी कर इस दुनिया भर में मानी जाने वाली चिंता को रेखांकित किया कि बिना रेगुलेशन के विदेशी पैसा लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित कर सकता है।

मंत्रालय ने अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) का उदाहरण दिया। इसके तहत राजनीतिक गतिविधियों या लॉबिंग में विदेशी प्रिंसिपल की ओर से काम करने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन और जानकारी देना अनिवार्य है। साथ ही यूके की फॉरेन इन्फ्लुएंस रजिस्ट्रेशन स्कीम 2025 का भी जिक्र किया, जिसमें विदेशी ताकत के साथ राजनीतिक प्रभाव वाले समझौतों के लिए दो साल तक की जेल का प्रावधान है। MHA ने बताया कि EU ने भी गैर-EU सरकारों की ओर से लॉबिंग के लिए सदस्य देशों में ट्रांसपेरेंसी रजिस्टर का प्रस्ताव दिया है।

FCRA रोक नहीं लगाता, इस दावे को खारिज करते हुए कि FCRA NGOs को विदेशी फंड लेने से रोकता है, MHA ने कहा कि 2024-25 में 16,200 संस्थाएं सक्रिय रूप से रजिस्टर्ड थीं और उन्हें विदेशी योगदान के तौर पर 22,963 करोड़ रुपए मिले। मंत्रालय ने कहा कि FCRA किसी धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाता। धर्म-आधारित कल्याणकारी गतिविधियां विदेशी फंडिंग के लिए योग्य बनी हुई हैं। प्रस्तावित बदलाव के तहत सरकार लिस्ट से हटाए गए NGOs की संपत्ति जब्त कर सकती है। सरकार ने कहा कि तय अथॉरिटी विदेशी फंड से बनाई गई संपत्ति का मैनेजमेंट तभी करेगी जब किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन कानूनी रूप से खत्म हो जाएगा। पूजा स्थलों का धार्मिक स्वरूप बना रहेगा और अपील करने का प्रावधान भी होगा। रजिस्टर्ड संस्थाओं में विदेशी नागरिकों को अहम भूमिकाओं से रोकने से यह पक्का होगा कि विदेशी योगदान का मैनेजमेंट ऐसे लोग करें जिनका भारत से वेरिफाइड कनेक्शन हो।

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क्या सोनम वांगचुक का प्रदर्शन केवल NEET पेपर लीक को लेकर है?

सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर ऐसा पुष्टि नहीं हुई है कि प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केवल FCRA संशोधन है।

FCRA क्या है?

FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों को नियंत्रित और विनियमित करने वाला भारतीय कानून है।

क्या SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द हुआ था?

इस संबंध में विभिन्न दावे सामने आए हैं। सरकार और संगठन के अलग-अलग पक्ष हैं, इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

सरकार FCRA संशोधन क्यों ला रही है?

सरकार का कहना है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए संशोधन आवश्यक हैं।

क्या वायरल वीडियो में किए गए सभी दावे सत्यापित हैं?

नहीं। सोशल मीडिया पर वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए उन्हें अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।