एबीवीपी ने यादवपुर विश्वविद्यालय में हिंसा,पट्टिका हटाने के पीछे ‘साजिश’ का पता लगाने की मांग की

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एबीवीपी ने यादवपुर विश्वविद्यालय में हिंसा,पट्टिका हटाने के पीछे ‘साजिश’ का पता लगाने की मांग की

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 10:27 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 10:27 PM IST

कोलकाता, 26 अगस्त (भाषा) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पिछले सप्ताह यादवपुर विश्वविद्यालय में हुई हिंसा और एक द्वार से विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न उखाड़े जाने के पीछे कथित ‘‘साजिश’’ का पता लगाने के लिए जांच की मांग करते हुए बुधवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन ने उन दो प्रोफेसर की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की, जिन्होंने द्वार संख्या चार से पट्टिका तोड़े जाने के लिए पास में प्रदर्शन कर रहे एबीवीपी समर्थकों को ‘‘बदनाम करने और फंसाने की’’ कथित तौर पर कोशिश की थी।

इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय छात्र संघ (एफईटीएसयू) की 19 अगस्त की शाम हुई आम बैठक के बाद उसी रात और 20 अगस्त को तड़के विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बाहरी लोगों को परिसर में लाने का आरोप लगाया था।

इससे जुड़ी एक अन्य घटना में 20 अगस्त की दोपहर भारतीय छात्र महासंघ (एसएफआई) और एबीवीपी समर्थकों की पुलिस के साथ उस समय धक्का-मुक्की हुई, जब दोनों संगठन एक ही सड़क के दो छोर से परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे और पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास कर रही थी। इसी अफरा-तफरी के दौरान विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न द्वार संख्या चार से उखाड़ दिया गया था।

यादवपुर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में एबीवीपी की विश्वविद्यालय इकाई के पदाधिकारी शुभब्रत अधिकारी ने कहा कि संगठन चाहता है कि सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर पट्टिका को नुकसान पहुंचाए जाने से जुड़ी परिस्थितियों की ‘‘निष्पक्ष, स्वतंत्र और व्यापक’’ जांच की जाए।

एबीवीपी ने यह भी मांग की कि जांच में यदि ‘‘साजिश, गलत सूचना फैलाने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने, उकसावे या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने में योगदान देने वाले किसी अन्य अपराध’’ के सबूत मिलते हैं, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

संगठन ने आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा वाले एक शिक्षक संगठन से जुड़े यादवपुर विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर उन शुरुआती लोगों में शामिल थे, जिन्होंने क्षतिग्रस्त पट्टिका का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि संबंधित प्रोफेसर ने एबीवीपी को ‘‘बदनाम करने और फंसाने’’ के इरादे से मीडिया के सामने प्रतीक चिह्न से जुड़ा मामला उठाया।

शिकायतकर्ता ने पुलिस से यह पता लगाने का भी अनुरोध किया कि क्या संबंधित प्रोफेसर के पास घटना से जुड़ा कोई वीडियो फुटेज या अन्य जानकारी थी और क्या उनका इसमें शामिल लोगों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संपर्क था।

संगठन ने आरोप लगाया कि घटना को संभवत: जानबूझकर अंजाम दिया गया और इसके बाद एक ‘‘विशेष राजनीतिक या वैचारिक संगठन’’ को बदनाम करने के इरादे से भ्रामक जानकारी फैलाई गई।

शिकायत में इस मामले में एक अन्य प्रोफेसर की कथित भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।

भाषा सिम्मी पारुल

पारुल