सही नीयत से की गयी कार्रवाई का समर्थन किया जाएगा : सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारी ने जवानों से कहा

सही नीयत से की गयी कार्रवाई का समर्थन किया जाएगा : सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारी ने जवानों से कहा

सही नीयत से की गयी कार्रवाई का समर्थन किया जाएगा : सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारी ने जवानों से कहा
Modified Date: July 27, 2026 / 09:42 pm IST
Published Date: July 27, 2026 9:42 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के आला अधिकारियों ने बल के जवानों और अफसरों को भरोसा दिलाया कि हाल के समय में अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाने के लिए उन्होंने जो भी फैसले लिए हैं, उनमें उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

इस संबंध में देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल की क्षेत्रीय इकाइयों को एक सूचना भेजी गई है। यह अर्द्धसैनिक बल दंगा और भीड़ पर नियंत्रण समेत आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई काम संभालता है।

यह संदेश ऐसे समय आया है, जब सीआरपीएफ मुख्यालय ने द्रुत कार्य बल (आरएएफ) को हालिया छात्र प्रदर्शनों के दौरान उसके जवानों पर लगे अत्यधिक बल प्रयोग और पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भी प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाई गई थी।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि सीआरपीएफ मुख्यालय ने हाल ही में मुश्किल हालात में अपनी ड्यूटी निभाते समय जवानों द्वारा दिखाए गए धैर्य और सहनशक्ति की “तारीफ” की है। इस संदेश में समय-सीमा का ज़िक्र नहीं किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि सेना के आला अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि देश और सुरक्षा बल के हित में, और अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाने के लिए सैनिकों और जमीनी स्तर के अधिकारियों द्वारा लिये गए किसी भी फैसले को मुख्यालय का समर्थन होगा।

अधिकारियों ने कहा कि जाहिर है, अगर कोई कर्मचारी लापरवाही या बिना किसी वाजिब वजह के कोई कार्रवाई करता है, तो सीआरपीएफ के नियमों और कानूनों के तहत उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने फिर कहा कि जब आरएएफ/सीआरपीएफ की जांच से यह साबित हो जाएगा कि पिछले हफ्ते दिल्ली में जवानों की कार्रवाई गलत थी या उन्होंने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का उल्लंघन किया था, तब औपचारिक ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ शुरू होगी।

सीआरपीएफ के महानिदेशक(डीजी) जी.पी. सिंह ने कहा, “अब, चूंकि आंदोलन वापस ले लिया गया है और इकट्ठा हुए लोग चले गए हैं, इसलिए हम किसी भी बड़े काम के बाद की तरह ही इस घटना के बाद भी पेशेवर तरीके से इसका आकलन करेंगे और फिर आपको सीआरपीएफ मुख्यालय की राय बताएंगे।”

उनसे पूछा गया था कि क्या सीआरपीएफ ने यह पता लगाया है कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) की ओर से छात्रों का एक महीने से ज्यादा समय तक चला विरोध-प्रदर्शन पिछले हफ्ते तब खत्म हुआ, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मानते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

अधिकारियों ने बताया कि जारी जांच में आरएएफ और सीआरपीएफ के जवानों, क्षेत्रीय कंपनी कमांडरों और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण की “विस्तृत” रूप से जांच की जा रही है और इस सिलसिले में उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

इस जांच में खास तौर पर आरएएफ/सीआरपीएफ के जवानों के खिलाफ सोशल मीडिया के कई वीडियो और प्रेस की खबरों में लगाए गए 9-10 आरोपों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसके अलावा, उन घटनाओं की भी जांच हो रही है, जिनमें कुछ जवान फंस गए थे और उपद्रवियों ने उन पर हमला किया था।

अधिकारियों ने कहा कि वे उन हालात की जांच कर रहे हैं, जिनमें कथित तौर पर पेलेट गन और ‘शॉक बैटन’ का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि कौन सा हथियार इस्तेमाल करना है, इसका फैसला पूरी तरह से मौके पर मौजूद जवान का होता है, लेकिन यह फैसला सही वजहों पर आधारित और तर्कसंगत होना चाहिए।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप


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