शुरुआती विवाद के बाद ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भारत के रोबोट का दिखा जलवा

शुरुआती विवाद के बाद ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भारत के रोबोट का दिखा जलवा

शुरुआती विवाद के बाद ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भारत के रोबोट का दिखा जलवा
Modified Date: February 21, 2026 / 10:06 pm IST
Published Date: February 21, 2026 10:06 pm IST

(अमन जोशी)

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में स्वदेशी रूप से निर्मित और विकसित रोबोट प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरे।

हालांकि, सम्मेलन की शुरुआत में एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा चीन में निर्मित रोबोट डॉग को अपना बताने के कारण विवाद शुरू हो गया था।

कानपुर के स्टार्टअप एक्स टेरा रोबोटिक्स द्वारा निर्मित रोबोट कुत्ता स्वान एम2 लोगों का खूब ध्यान खींच रहा था। एक्स टेरा रोबोटिक्स के सह-संस्थापक ने बताया कि इस उत्पाद को विकसित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के छात्रों और शिक्षकों द्वारा वर्षों तक अनुसंधान किया गया।

एल्यूमीनियम मिश्र धातु से बने शरीर और पैरों वाले स्वान एम2, अपने लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लीडर) उपकरण का इस्तेमाल करके अपने परिवेश का सटीक 3डी चित्रण तैयार करता है।

इसका उपयोग किसी खतरनाक क्षेत्र की निगरानी करने या बिजली संयंत्रों में थर्मल इमेजिंग के माध्यम से केंद्र का निरीक्षण करने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा क्षेत्र में, रोबोट कुत्ता खतरे का पता लगाने और किसी क्षेत्र की 3डी मैपिंग करके तथा दूरस्थ टीम को चित्र भेजकर जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निमेश खंडेलवाल, अविनाश भास्कर, अमृतांशु मनु, आदित्य राजावत और शक्ति एस गुप्ता द्वारा 2023 में स्थापित एक्स टेरा रोबोटिक्स, आईआईटी कानपुर परिसर में स्थित है। सह-संस्थापक साक्षी एस गुप्ता ने बताया कि कंपनी स्वान एम2 का उत्पादन बढ़ाने और इसकी कीमत को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की योजना बना रही है।

‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में किया गया, जिसमें कई राष्ट्राध्यक्षों, वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कई दिग्गजों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं, वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों और अन्य शख्सियतों की उपस्थिति देखी गई।

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (यूएनडब्ल्यूएफपी) के रोबोट ने काफी ध्यान आकर्षित किया। भारत में परिकल्पित और विकसित, आठ फुट ऊंचा टावर के आकार का यह रोबोट एक पायलट प्रोजेक्ट है, जिसे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य के गोदामों के लिए विकसित किया गया है।

इसमें प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर है, और सेंसर के आधार पर यह एक साथ तापमान और गैसों के रिसाव जैसी चीजों का पता लगा सकता है, जिसमें फॉस्फीन भी शामिल है, जो सांस लेने पर मनुष्यों के लिए घातक हो सकती है। गोदामों में कीटों को दूर रखने के लिए फॉस्फीन का इस्तेमाल किया जाता है।

यूएनडब्ल्यूएफपी के अमित कुमार ने कहा, “अगर यह रोबोट गोदाम में हो, तो निरीक्षण के लिए किसी को अंदर जाने की जरूरत नहीं है। गोदाम के अंदर जो कुछ भी हो रहा है… यह हमारी निगरानी का जरिया है।’’

उन्होंने कहा, “हमने नरेला (खाद्य भंडारण डिपो) में इसका परीक्षण किया है। इसमें कुछ सुधार की आवश्यकता है, जिसके बाद लगभग एक से दो महीने में इसे एक गोदाम में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जाएगा।”

मध्यप्रदेश दीर्घा में राज्य का पहला 3डी प्रिंटेड ह्यूमनॉइड रोबोट प्रदर्शित किया गया, जिसे कक्षा सातवीं और आठवीं के छात्रों ने स्टार्टअप यंगोवेटर के सहयोग से विकसित किया है।

दो फुट ऊंचे युग बॉट का ढांचा प्लास्टिक का बना है, जिसमें ऊपर से नीचे और बाएं से दाएं कुछ तार लगे हैं। इसका सिर घनाकार है, जिसके केंद्र में दो छोटे वृत्त हैं और कृत्रिम आंखें लगी हैं।

यंगोवेटर के तकनीकी संचालन प्रमुख कार्तिक पांडे ने कहा, “यह पूरी तरह से स्वदेशी उत्पाद है।”

विभिन्न स्कूलों में बच्चों को उनकी तकनीक से संबंधित गतिविधियों में सहायता करने वाला यह स्टार्टअप इस बॉट का विस्तार करने की योजना बना रहा है।

हालांकि, यह शिखर सम्मेलन विवादों से अछूता नहीं रहा।

भाषा आशीष वैभव

वैभव


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