टेनिस कोर्ट के बाद अब भाजपा के साथ राजनीति के मैदान में उतरेंगे पेस

टेनिस कोर्ट के बाद अब भाजपा के साथ राजनीति के मैदान में उतरेंगे पेस

टेनिस कोर्ट के बाद अब भाजपा के साथ राजनीति के मैदान में उतरेंगे पेस
Modified Date: March 31, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: March 31, 2026 3:22 pm IST

( तस्वीर सहित )

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) अपने शानदार कैरियर से भारतीय टेनिस की कई पीढ़ियों को प्रेरित करने वाले लिएंडर पेस मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और अब राजनीति की पिच पर एक नयी पारी खेलने को तैयार हैं ।

51 वर्ष के पेस ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा से जुड़ने का फैसला किया । वह 2021 में बंगाल में सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे और 2022 गोवा चुनाव में प्रचार भी किया था ।

करीब तीन दशक तक भारतीय टेनिस का चेहरा रहे पेस उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक थे जिन्होंने बड़े मौकों पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया ।

भाजपा में शामिल होकर वह उन बड़े खिलाड़ियेां की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने खेलों के मैदान पर मिली सफलता को जनसेवा से जोड़ने की कोशिश की है ।

अटलांटा ओलंपिक 1996 में पुरूष एकल वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाले पेस ने ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक का भारत का लंबा इंतजार खत्म किया । उनसे पहले 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में कुश्ती में कशाबा जाधव ने कांस्य पदक जीता था ।

भारत के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ियों में शुमार पेस का कैरियर लंबा और सुनहरा रहा । पेस ने 18 ग्रैंडस्लैम खिताब जीते जिनमें आठ पुरूष युगल में और 10 मिश्रित युगल में थे । अपनी चपलता, शानदार वॉली और कोर्ट पर जोश के लिये मशहूर पेस चालीस पार की उम्र में भी पेशेवर सर्किट पर सक्रिय रहे ।

वह भारतीय डेविस कप टीम की भी रीढ थे और ऊंची रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत दिलाने में सूत्रधार रहे । महेश भूपति के साथ उनकी जोड़ी को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ कहा जाता था । दोनों ने कई ग्रैंडस्लैम और एटीपी खिताब जीतकर भारत को टेनिस के वैश्विक मानचित्र पर पहचान दिलाई ।

मूल रूप से गोवा के रहने वाले पेस इससे पहले 2021 में गोवा में ही तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे जब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने उन्हें छोटा भाई कहा था ।

वह हाल ही में बंगाल टेनिस संघ के अध्यक्ष बने और अब नये राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के तहत अखिल भारतीय टेनिस संघ के ताजा चुनाव में भी वह प्रत्याशी हो सकते हैं । एआईटीए के चुनाव सितंबर 2024 में हुए थे लेकिन उसका नतीजा दिल्ली उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में जमा है ।

भाषा

मोना मनीषा

मनीषा


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