डॉक्टर की नैतिक जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकती एआई : उपराष्ट्रपति
डॉक्टर की नैतिक जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकती एआई : उपराष्ट्रपति
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने मंगलवार को कहा कि कोई भी कृत्रिम मेधा (एआई) मरीज के बिस्तर के बगल में खड़े चिकित्सक की नैतिक जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकती।
उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि वे “मरीजों के प्रति धैर्यशील” रहें।
उन्होंने यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के 51वें दीक्षांत समारोह में कहा कि चिकित्सकों को विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन का अवसर गंवाना नहीं चाहिए, लेकिन उन्हें अपने देश और अपने लोगों की सेवा के लिए लौटना ही चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि एआई-संचालित तकनीक चिकित्सा समेत कई क्षेत्रों में अपनी जगह बना रही है। उन्होंने कहा, “लेकिन कोई भी एआई मरीज के बिस्तर के बगल में खड़े डॉक्टर के नैतिक दायित्व की जगह नहीं ले सकती।”
राधाकृष्णन ने डॉक्टरों से कहा, ‘‘आपकी मानवीय संवेदना और कुछ विनम्र शब्द दवा से ज्यादा असरकारी हो सकते हैं।’’
उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि जब मरीज बेतुके प्रश्न पूछें, तो वे उनके प्रति धैर्य रखें।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “जब आप उन्हें चीजों को समझाएंगे, तो वे समझेंगे।”
उन्होंने कहा कि अन्य स्थानों पर एम्स खोलने से स्वास्थ्य सेवाएं उन क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले नहीं थी तथा दूर-दराज के लोगों को इलाज के लिए दिल्ली नहीं भागना पड़ता है।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई राज्यों में नए चिकित्सा और नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सराहना भी की।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा भी उपस्थित थे।
भाषा राजकुमार अविनाश
अविनाश

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