अकाल तख्त ने लापता 328 ‘सरूपों’ की जांच में एसजीपीसी से सहयोग करने को कहा

अकाल तख्त ने लापता 328 ‘सरूपों’ की जांच में एसजीपीसी से सहयोग करने को कहा

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  • Publish Date - January 12, 2026 / 08:02 PM IST,
    Updated On - January 12, 2026 / 08:02 PM IST

अमृतसर, 12 जनवरी (भाषा) अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सोमवार को एसजीपीसी को गुरु ग्रंथ साहिब के 328 गुमशुदा पवित्र ‘सरूपों’ (पवित्र प्रतियां) के मामले में पंजाब सरकार के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया।

जत्थेदार ने सोमवार को कहा, ‘‘पवित्र सरूपों के इस मामले में कुछ लोगों द्वारा संगत (सिख समुदाय) में उत्पन्न की जा रही भ्रांति को देखते हुए और व्यापक पंथिक हितों को ध्यान में रखते हुए, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को 328 पवित्र सरूपों के मुद्दे पर सरकार को उचित सहयोग देने के लिए अधिकृत किया जाता है।’’

सोमवार को अकाल तख्त सचिवालय से जारी एक बयान में जत्थेदार ने कहा कि यदि सरकार को जांच के लिए एसजीपीसी से किसी भी जानकारी की आवश्यकता हो, तो मांगी गई जानकारी एसजीपीसी के चंडीगढ़ स्थित उप कार्यालय में एसजीपीसी अध्यक्ष धामी की उपस्थिति में देखी जा सकती है।

एसजीपीसी ने मंगलवार को कहा था कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र सरूपों के मामले में पुलिस के साथ सहयोग नहीं करेगी और ना ही कोई रिकॉर्ड साझा करेगी।

पंजाब पुलिस की एक विशेष टीम गुरु ग्रंथ साहिब के 328 लापता सरूपों के मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने 2020 में लापता हुए सरूपों के संबंध में पिछले साल सात दिसंबर को अमृतसर में एसजीपीसी के एक पूर्व अधिकारी सहित 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अमृतसर स्थित एसजीपीसी प्रकाशन गृह से ‘सरूपों’ के गायब होने का मामला जून 2020 में सामने आया था, जिससे उस समय काफी विवाद हुआ था।

इस बीच, जत्थेदार गड़गज ने सोमवार को कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिखों के शाश्वत गुरु हैं, और दुनिया भर में प्रत्येक सिख और गुरु नानक देव के अनुयायी गुरु साहिब के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति रखते हैं।

उन्होंने कहा कि 328 ‘सरूपों’ के संबंध में अकाल तख्त साहिब द्वारा ईश्वर सिंह की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया गया था।

आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये पवित्र सरूप संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से संगत को दिए गए थे, और निर्धारित चढ़ावे न तो ट्रस्ट फंड में जमा किए गए और न ही बिल जारी किए गए। उन्होंने कहा कि यह मामला कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा वित्तीय गबन से संबंधित है।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश