328 पवित्र ‘सरूप’ मामले में अकाल तख्त के आदेशों का पालन किया जा रहा है: एसजीपीसी

328 पवित्र ‘सरूप’ मामले में अकाल तख्त के आदेशों का पालन किया जा रहा है: एसजीपीसी

328 पवित्र ‘सरूप’ मामले में अकाल तख्त के आदेशों का पालन किया जा रहा है: एसजीपीसी
Modified Date: January 6, 2026 / 08:41 pm IST
Published Date: January 6, 2026 8:41 pm IST

अमृतसर, छह जनवरी (भाषा) एसजीपीसी ने मंगलवार को कहा कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र ‘सरूपों’ से संबंधित मामले में न तो पुलिस के साथ सहयोग करेगी और न ही कोई रिकॉर्ड साझा करेगी।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने सचिव प्रताप सिंह के नेतृत्व में यहां आयोजित अधिकारियों की बैठक के बाद अपना रुख स्पष्ट किया।

प्रताप सिंह ने कहा कि इस मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है, जिनके आदेश सिख संस्था के लिए अंतिम हैं।

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प्रताप सिंह ने कहा कि तीन कर्मचारी- कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलवीर सिंह कथित तौर पर पवित्र ‘सरूपों’ से जुड़े चढ़ावे का निजी फायदा उठाने और रिकॉर्ड में हेरफेर करने में सीधे तौर पर शामिल पाए गए। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है।

प्रताप सिंह ने कहा कि एसजीपीसी के नियमों के अनुसार, जब श्रद्धालु या गुरुद्वारा समितियां ‘सरूप’ मांगती हैं, तो सचिव स्तर पर सत्यापन के बाद ही स्वीकृति दी जाती है। चढ़ावा जमा किया जाता है, रसीद जारी की जाती है और आधिकारिक अभिलेखों में प्रविष्टियां की जाती हैं।

आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों ने इस निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

एसजीपीसी के पदाधिकारियों ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों को भी खारिज कर दिया और उन्हें ‘बेबुनियाद’ बताते हुए कहा कि ये बयान सिख संस्था को बदनाम करने के उद्देश्य से दिए गए हैं।

भाषा नोमान वैभव

वैभव


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