पुलिसकर्मियों पर हमले से जुड़े मामले में आरोप तय करने के खिलाफ अलका लांबा की याचिका खारिज

पुलिसकर्मियों पर हमले से जुड़े मामले में आरोप तय करने के खिलाफ अलका लांबा की याचिका खारिज

पुलिसकर्मियों पर हमले से जुड़े मामले में आरोप तय करने के खिलाफ अलका लांबा की याचिका खारिज
Modified Date: February 6, 2026 / 04:03 pm IST
Published Date: February 6, 2026 4:03 pm IST

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता अलका लांबा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2024 में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमले से जुड़े मामले में आरोप तय करने के मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी।

विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने लांबा की ओर से मजिस्ट्रेट अदालत के दिसंबर 2025 के फैसले के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए यह निष्कर्ष निकाला था कि लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

अभियोजन पक्ष ने कांग्रेस नेता पर 29 जुलाई 2024 को जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण के समर्थन में किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस के काम में बाधा डालने और सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध करने का आरोप लगाया है।

मजिस्ट्रेट अदालत ने पिछले साल 19 दिसंबर को आदेश दिया था कि मामले में लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने, लोक अधिकारी के कार्य में बाधा डालने, लोक सेवक की ओर से विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करने और सार्वजनिक मार्ग में खतरा या बाधा उत्पन्न करने के अपराधों के लिए आरोप तय किए जाएं।

शुक्रवार को पारित आदेश में अदालत ने कहा, “निचली अदालत (मजिस्ट्रेट न्यायालय) ने चश्मदीदों के बयानों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच-पड़ताल की और इस निष्कर्ष पर पहुंची कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है। आरोप तय करने का मानदंड संदेह से परे सबूत नहीं, बल्कि कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार होना है।”

अदालत ने स्वतंत्र गवाहों की कमी, चोटों की अनुपस्थिति और विरोध की प्रकृति के संबंध में लांबा की ओर से दी गई दलीलों को खारिज कर दिया। उसने कहा कि इन पहलुओं को मुकदमे के दौरान स्थापित किए जाने की आवश्यकता है और इन पर पहले से कोई राय नहीं कायम की जा सकती है।

अदालत ने कहा, “चूंकि, विवादित आदेश में कोई स्पष्ट अवैधता, विकृति या क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि नहीं है, इसलिए वर्तमान पुनरीक्षण याचिका खारिज की जाती है।”

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में