एसआईआर के सभी फैसले सर्वसम्मति से, कैबिनेट सचिव को पत्र नीतिगत मामलों से संबंधित नहीं: आयोग

एसआईआर के सभी फैसले सर्वसम्मति से, कैबिनेट सचिव को पत्र नीतिगत मामलों से संबंधित नहीं: आयोग

एसआईआर के सभी फैसले सर्वसम्मति से, कैबिनेट सचिव को पत्र नीतिगत मामलों से संबंधित नहीं: आयोग
Modified Date: September 26, 2026 / 06:19 pm IST
Published Date: September 26, 2026 6:19 pm IST

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है।

दो निर्वाचन आयुक्तों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच मतभेदों को लेकर विवाद के बीच, निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि दो आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग या उसके आईटी डिवीजन के किसी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं थे, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित थे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त समेत दोनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी बयान में आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-पुनर्वितरण के आदेश दो निर्वाचन आयुक्तों के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किए गए थे। साथ ही, उप निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की ओर से आईटी प्रभाग की निगरानी भी कभी वापस नहीं ली गई थी।

निर्वाचन आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में उसने देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण समेत कई फैसले लिये हैं। आयोग ने 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराने का आदेश जारी किया था, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई और इसके बाद पश्चिम बंगाल तथा 30 अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया गया। आयोग ने कहा कि यह आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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