प्रयागराज, 12 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) की ओर से जमीन पर कब्जा दिए जाने में हुए विलंब को गंभीरता से लेते हुए मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
अदालत ने मुख्यमंत्री से केडीए के अधिकारियों की कथित लापरवाही की जांच का निर्देश देने और एक आबंटित भूमि का कब्जा देने में 41 वर्षों के विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से नुकसान की वसूली करने का आह्वान किया।
न्यायमूर्ति संदीप जैन ने 90 वर्षीय वादी बीएन त्रिपाठी की प्रथम अपील स्वीकार करते हुए यह निर्देश पारित किया। त्रिपाठी ने 1984 में सबसे ऊंची बोली लगाकर का पट्टा हासिल किया था, लेकिन बार बार अनुरोध के बावजूद केडीए ने कब्जा नहीं दिया।
अदालत ने कहा, “ईश्वर ही जानता है कि कब उन्हें जमीन का कब्जा मिल सकेगा। इस बीच, दूसरी वादी युगरानी देवी की 13 सितंबर, 2011 को मृत्यु हो गई और प्रथम वादी बीएन त्रिपाठी अब करीब 90 वर्ष के हो चुके हैं।”
अदालत ने कहा, “चूंकि केडीए राज्य का एक वैधानिक निकाय है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार भी केडीए द्वारा किए गए मनमाने और अवैध कृत्यों के लिए परोक्ष रूप से उत्तरदायी है।”
अदालत ने कहा, “यह अदालत चाहती है कि मुख्यमंत्री इस मामले को देखें और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कानून के मुताबिक उनसे नुकसान की भरपाई भी कराएं।”
भाषा सं राजेंद्र जोहेब
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