इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस्लामी प्रार्थना को लेकर निलंबित अध्यापक को राहत प्रदान की

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस्लामी प्रार्थना को लेकर निलंबित अध्यापक को राहत प्रदान की

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस्लामी प्रार्थना को लेकर निलंबित अध्यापक को राहत प्रदान की
Modified Date: September 16, 2026 / 12:37 am IST
Published Date: September 16, 2026 12:37 am IST

प्रयागराज, 15 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विद्यालय में विद्यार्थियों से इस्लामी प्रार्थनाएं करवाने और बच्चों को इस्लामी परिधान पहनने की अनुमति देने के आरोपों को लेकर निलंबित किए गए एक अध्यापक को राहत दी है।

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अध्यापक मोहम्मद अंजार अहमद द्वारा दायर याचिका निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय जांच जल्द से जल्द संभव हो तो 15 दिनों के भीतर पूरी की जाए और जांच पूरी होने तक निलंबन का आदेश स्थगित रखा जाए।

अहमद ने संभल के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 10 मई, 2026 को पारित निलंबन आदेश को चुनौती दी थी।

आरोप है कि जब याचिकाकर्ता प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत थे, तब विद्यार्थी इस्लामी प्रार्थनाएं करते थे और ऐसी वर्दी पहनते थे, जिससे उनकी पहचान एक ‘‘विशेष समुदाय’’ के सदस्य के रूप में होती थी।

हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि उक्त अवधि के दौरान उसने अवकाश ले रखा था और उसके कार्यकाल में कथित गतिविधियां नहीं हुईं। साथ ही यह दलील भी दी गई कि यदि मान भी लें कि उक्त अवधि में याचिकाकर्ता प्रभारी प्रधानाध्यापक थे, तो भी यह दंड जरूरत से अधिक कठोर था और विभागीय नियमों के मुताबिक नहीं था।

वहीं, दूसरी ओर सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, याचिकाकर्ता उस प्रार्थना सभा में मौजूद था, जहां विद्यार्थी इस्लामी प्रार्थनाएं कर रहे थे।

पीठ ने सात सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि अध्यापक विभागीय जांच के दौरान अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकते हैं और दस्तावेज दिखा सकते हैं। विभागीय जांच के दौरान याचिकाकर्ता को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा।

भाषा सं राजेंद्र गोला

गोला


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