इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली हिंसा मामले में प्राथमिकी रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली हिंसा मामले में प्राथमिकी रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली हिंसा मामले में प्राथमिकी रद्द करने से किया इनकार
Modified Date: March 12, 2026 / 10:10 pm IST
Published Date: March 12, 2026 10:10 pm IST

प्रयागराज, 12 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 में बरेली में हुई हिंसा के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है और 24 नवंबर 2025 को पारित वह अंतरिम रोक भी हटा ली, जिसके तहत कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी।

इन प्राथमिकियों में आरोप है कि एक भीड़ ने “सिर तन से जुदा” का नारा लगाते हुए पथराव किया और तेजाब की बोतलें फेंकी।

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने आशु और कई अन्य की याचिकाओं पर नौ मार्च 2026 को यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इसी घटना को लेकर पहले एक उप-निरीक्षक द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी तथा बाद में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई।

उनका कहना था कि चूंकि दूसरी प्राथमिकी उसी घटना से संबंधित है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, ‘‘यद्यपि उक्त प्राथमिकी निःसंदेह उसी घटना से संबंधित है, लेकिन उसमें घटना की व्यापकता और गैरकानूनी रूप से लोगों के एकत्रित होने की बात दर्ज की गई है। पहले दर्ज प्राथमिकी में केवल यह उल्लेख था कि गैरकानूनी रूप से इकट्ठा हुए लोगों ने एक पुलिसकर्मी की लाठी छीन ली और उसकी वर्दी फाड़ने का प्रयास किया। यह उस घटना का एक बहुत छोटा हिस्सा है, जिसका विस्तृत विवरण दूसरी प्राथमिकी में दिया गया है।’’

अदालत ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा, ‘‘सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हम दूसरी प्राथमिकी को रद्द करने का कोई उचित आधार नहीं पाते हैं।’’

आरोप है कि 26 सितंबर को हुई हिंसा के दौरान तौकीर रजा के समर्थकों ने भड़काऊ नारे लगाए और विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद अधिकारियों पर पेट्रोल बम और पत्थर फेंके।

बरेली प्रशासन ने नवरात्रि और उर्स को देखते हुए

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की थी। रजा ने सरकारी पाबंदियों को चुनौती देते हुए एक वीडियो जारी किया था, जिसमें विरोध-प्रदर्शन रोकने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी।

जब पुलिस ने हस्तक्षेप किया, हिंसा खलील तिराहा से फैलकर नौमहल्ला मस्जिद, कोतवाली, एसपी सिटी कार्यालय, नॉवेल्टी चौराहा, आजमनगर और श्यामगंज क्षेत्रों तक फैल गई।

भाषा सं राजेंद्र खारी

खारी


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