उप्र: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
उप्र: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
प्रयागराज, 29 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फर्रुखाबाद के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की कथित बदहाली का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के लिए मुकदमे का सामना कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के सदस्य और छात्र गौरव भाटिया उर्फ गौरव कुमार की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
भाटिया ने प्राथमिकी को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्र की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 22 सितंबर को दिये आदेश में राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
भाटिया के खिलाफ 19 अगस्त को फतेहगढ़ जिले के नवाबगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), धारा 353 (भड़काऊ बयानों के प्रसार से संबंधित प्रावधान) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी और उसके बाद की कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध करते हुए कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को सही मान भी लिया जाए, तब भी संबंधित अपराधों के आवश्यक तत्व सामने नहीं आते हैं।
याचिका के मुताबिक, भाटिया ने 16 अगस्त को फर्रुखाबाद के करनपुर मजरा बसमाल स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कथित तौर पर प्रवेश किया और स्कूल की स्थिति का वीडियो बनाया।
याचिका में दावा किया गया कि उस दिन स्कूल बंद था और वीडियो में एक जर्जर इमारत दिखाई गई थी।
याचिकाकर्ता ने वीडियो में यह भी कहा था कि स्कूल परिसर में पानी भर गया है, जिससे बच्चों के बैठने के लिए जगह नहीं है और इसी कारण उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वीडियो एक सार्वजनिक शिक्षण संस्थान की स्थिति को सामने लाने की नेक नीयत से बनाया गया था और यह बच्चों के कल्याण एवं सुविधाओं से जुड़ा मामला है।
हालांकि, इसके बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उन्होंने संस्थान का अवैध रूप से वीडियो बनाया और उसकी स्थिति को गलत तरीके से पेश किया।
याचिका में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता की सोशल मीडिया पर अच्छी-खासी पहुंच है और ‘इंस्टाग्राम’ पर करीब ढाई लाख तथा ‘फेसबुक’ पर करीब डेढ़ लाख लोग उन्हें फॉलो करते हैं।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता शराब के नशे में एक अज्ञात व्यक्ति के साथ स्कूल में दाखिल हुए और उस व्यक्ति ने शिक्षकों से अभद्र भाषा में बातचीत की।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
जितेंद्र

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