बीएमआईसीपी के जमीन गंवाने वालों को भूखंड आवंटन न्यायालय के फैसले के खिलाफ होगा: देवेगौड़ा

बीएमआईसीपी के जमीन गंवाने वालों को भूखंड आवंटन न्यायालय के फैसले के खिलाफ होगा: देवेगौड़ा

बीएमआईसीपी के जमीन गंवाने वालों को भूखंड आवंटन न्यायालय के फैसले के खिलाफ होगा: देवेगौड़ा
Modified Date: September 7, 2026 / 04:01 pm IST
Published Date: September 7, 2026 4:01 pm IST

(फाइल फोटो सहित)

बेंगलुरु, सात सितंबर (भाषा) पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने कर्नाटक सरकार के कथित तौर पर बीएमआईसीपी के लिए जमीन गंवाने वाले लोगों को 1,453 भूखंड आवंटित करने के फैसले पर सोमवार को सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम उच्चतम न्यायालय के फैसलों और इस मुद्दे पर सरकार के पहले के रुख के विपरीत हो सकता है।

मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को लिखे एक खुले पत्र में जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता देवेगौड़ा ने कहा कि मंत्रिमंडल ने चार सितंबर को नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज लिमिटेड (एनआईसीईएल) को ये भूखंड आवंटित करने का निर्देश दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस फैसले को न्यायिक मंजूरी मिलने का दावा कर ‘‘कानून के शासन को कमजोर करने’’ की कोशिश कर रही है।

देवेगौड़ा ने कहा, ‘‘आपका मंत्रिमंडल जिस तरह जनता को गुमराह करके कानून के शासन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है, वह वाकई हैरान करने वाला है।’’

उन्होंने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने 2016 में उच्चतम न्यायालय से कहा था कि बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (बीएमआईसीपी) के इंटरचेंज पर भूखंडों का निर्माण करने की अनुमति देना तीन अप्रैल, 1997 के प्रारूप समझौते (एफडब्ल्यूए) के प्रावधानों के खिलाफ होगा और यह अदालत के आदेशों की अवमानना के बराबर हो सकता है।

देवेगौड़ा ने कहा कि इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने भी राज्य सरकार के रुख को सही ठहराया और स्पष्ट रूप से कहा था कि एनआईसीईएल प्रारूप समझौते से बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि नियमों के उल्लंघन से परियोजना के उस उद्देश्य को नुकसान पहुंचेगा, जिसके तहत शहरी यातायात जाम को कम करना है।

उन्होंने मार्च 2023 में उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार के रुख का भी हवाला दिया। इसमें एनआईसीईएल के जमीन गंवाने वाले लोगों को भूखंड आवंटित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।

देवेगौड़ा ने कहा, ‘‘इस साल जनवरी में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा था कि प्रारूप सझौते के उल्लंघन में इंटरचेंज या सड़कों के लिए दी गई जमीन पर भूखंडों के जरिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता।’’

उन्होंने मडावरा, कोडिगेहल्ली, केंगेरी, कोमघट्टा, वराहसंद्रा, सोमपुरा, पिल्लगनहल्ली, केमाथनहल्ली, यूएम कवल, चिक्काथोगुरु, पंथरापाल्या, के. जी. श्रीकांतपुरा और गंगोंडनहल्ली में प्रस्तावित भूखंड आवंटन पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इन गांवों की जमीनें बीएमआईसीपी के सड़क और संबंधित बुनियादी ढांचे वाले हिस्से के अंतर्गत आती हैं।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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