अमित शाह ने नये आपराधिक कानूनों को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए एक साल की समयसीमा तय की

अमित शाह ने नये आपराधिक कानूनों को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए एक साल की समयसीमा तय की

अमित शाह ने नये आपराधिक कानूनों को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए एक साल की समयसीमा तय की
Modified Date: August 26, 2026 / 12:36 am IST
Published Date: August 26, 2026 12:36 am IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन नये आपराधिक कानूनों को अगले एक वर्ष में शत-प्रतिशत लागू करने की समयसीमा तय करते हुए मंगलवार को कहा कि इससे आपराधिक मामलों का उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष के भीतर निस्तारण संभव होगा और दोषसिद्धि की दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

आसूचना ब्यूरो (आईबी) के दो दिवसीय नौवें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन-2026’ के मंगलवार को समाप्त हुए सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि इस मंच को सुरक्षा चुनौतियों का अनुमान 15 से 20 साल पहले ही लगाकर उसके अनुरूप रणनीति बनानी चाहिए ताकि उन्हें बड़ा खतरा बनने से रोका जा सके।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) एक जुलाई 2024 से लागू हुए थे। इन कानूनों ने ब्रिटिश शासन के समय की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य कानून की जगह ली।

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘अगले एक वर्ष में तीनों नये कानूनों को शत-प्रतिशत लागू किया जाएगा, ताकि आपराधिक मामलों का उच्चतम न्यायालय तक तीन वर्ष के भीतर निपटारा हो सके और दोषसिद्धि की दर में 25 प्रतिशत की वृद्धि हो।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन प्रमुख चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों-नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर में उग्रवाद-से पैदा हुई चुनौतियों को ‘‘समाप्त’’ कर दिया है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सभी राज्यों के पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को दिया।

शाह ने घुसपैठियों को राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा बताते हुए कहा कि भारत में रहने का अधिकार केवल देश के नागरिकों को है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह देश धर्मशाला नहीं है और केवल देश के नागरिकों को ही यहां रहने का अधिकार है। घुसपैठिये देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा हैं।’’

गृह मंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त करने और उसके हर तरह के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ‘प्रहार’ दस्तावेज को रोजमर्रा के कामकाज में उतारने की जरूरत है।

उन्होंने नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘‘पता लगाओ, बाधित करो और नष्ट करो’’ की त्रिस्तरीय रणनीति अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ सबसे सफल लड़ाई भारत ही लड़ सकता है।

भाषा सिम्मी सुभाष

सुभाष


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