तेलंगाना के प्राचीन गोल्लाला गुडी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया

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तेलंगाना के प्राचीन गोल्लाला गुडी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया

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  • Publish Date - September 2, 2026 / 05:05 PM IST,
    Updated On - September 2, 2026 / 05:05 PM IST

नयी दिल्ली/हैदराबाद, दो सितंबर (भाषा) तेलंगाना में स्थित प्राचीन गोल्लाला गुडी मंदिर को सरकार ने राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के तौर पर अधिसूचित किया है। यह मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी और वास्तुशिल्प धरोहर के लिए प्रसिद्ध है।

काकतीय-युगीन ‘त्रिकुटालय’ शैली का यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर के पास स्थित है।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘तेलंगाना में मुलुगु जिले के पालमपेट में मौजूद ऐतिहासिक गोल्लाला गुडी मंदिर को एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) भारत सरकार ने राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया है! यूनेस्को की सूची में शामिल रामप्पा मंदिर के पास स्थित काकतीय-युगीन त्रिकुटालय मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और वास्तुशिल्प धरोहर के लिए प्रसिद्ध है।’’

पीआईबी ने अपने पोस्ट में संस्कृति मंत्रालय द्वारा 31 अगस्त को जारी अधिसूचना की एक प्रति भी साझा की।

एएसआई के एक अधिकारी ने बताया कि गोल्लाला गुडी एक ‘‘त्रिकुटालय’’ (तीन गर्भगृह वाला मंदिर) है, जिसमें पूर्वमुखीय एक मंडप और तीन गर्भगृह हैं। मध्य में स्थित गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है।

काकतीय राजवंश एक तेलुगु राजवंश था जिसने 12वीं और 14वीं शताब्दी के बीच मौजूदा भारत के पूर्वी दक्कन क्षेत्र के अधिकांश हिस्से पर शासन किया। इसका राज्य क्षेत्र आज के तेलंगाना और आंध्र प्रदेश, पूर्वी कर्नाटक के कुछ हिस्सों, उत्तरी तमिलनाडु तथा दक्षिणी ओडिशा तक फैला हुआ था।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश