आंध्र प्रदेश: मोरी-5 कुएं में आग पर ओएनजीसी का नियंत्रण

आंध्र प्रदेश: मोरी-5 कुएं में आग पर ओएनजीसी का नियंत्रण

आंध्र प्रदेश: मोरी-5 कुएं में आग पर ओएनजीसी का नियंत्रण
Modified Date: January 7, 2026 / 09:35 pm IST
Published Date: January 7, 2026 9:35 pm IST

मोरी (आंध्र प्रदेश), सात जनवरी (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल एवं गैस उत्पादक ‘महारत्न’ कंपनी तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने बुधवार को कहा कि बीआर आंबेडकर कोनासीमा जिले में अनियंत्रित गैस रिसाव (ब्लोआउट) के कारण गैस के कुएं में लगी आग के और अधिक फैलने की ‘आशंका बेहद कम’ है।

आंध्र प्रदेश में ओएनजीसी के ‘मोरी-5’ कुएं से गैस रिसाव के बाद पांच जनवरी को मोरी और इरुसुमांडा गांवों के पास आग की 20 मीटर ऊंची और 25 मीटर चौड़ी लपटें देखी गई थीं।

‘ब्लोआउट’ का मतलब दबाव नियंत्रण प्रणालियों की विफलता के बाद तेल या गैस के कुएं से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस का अनियंत्रित रिसाव होना है।

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इस घटना के कारण एहतियात के तौर पर सैकड़ों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हालांकि, अधिकारी ने बताया है कि आग की तीव्रता अब पहले से कम हो गई है।

हालांकि, ओएनजीसी ने जोर देकर कहा कि गैस रिसाव को नियंत्रित करने के अभियान में उसने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।

ओएनजीसी की एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘गैस रिसाव को नियंत्रित करने के अभियान में लगातार प्रगति के मद्देनजर, स्थिति और बिगड़ने की संभावना बेहद कम है। इसलिए जिला प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को अपनी सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू करने की सलाह दी है।’

ओएनजीसी ने बताया कि अहमदाबाद स्थित सूचीबद्ध कंपनी डीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड मोरी-5 कुएं में लगी आग (ब्लोआउट) को बुझाने के लिए विशेष अभियान चला रही है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विशेषज्ञों की टीम तय योजना के तहत आग बुझाने के काम में जुटी है। अब कुएं के पास आग की लपटें और गर्मी काफी कम हो गई है।

कंपनी ने बताया कि कुएं के पास से मलबा हटाने में आसानी के लिए संपर्क मार्ग तैयार किया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘कुएं के मुहाने के पास से मलबा हटाने और फिर उसे बंद करने की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए वहां एक जल आवरण स्थापित किया गया है।’’

फिलहाल, दिल्ली और मुंबई से ओएनजीसी की विशेष टीम पांच जनवरी से गैस के कुएं में लगी आग को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद है।

एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि कुआं साफ-साफ दिखे इसके लिए कर्मचारी घटनास्थल के आसपास से मलबा हटा रहे हैं।

कोनासीमा जिले की संयुक्त कलेक्टर टी. निशांती ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “उनके (ओएनजीसी के) पास मुंबई और दिल्ली की टीम मौजूद हैं। एक बार घटनास्थल से मलबा हटा दिया जाए और कुएं की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखने लगे, तब वे आगे की कार्ययोजना तैयार करेंगे। तभी वे यह तय करेंगे कि कुएं को बंद करना है या ‘वाइल्ड वेल कंट्रोल’ जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद लेनी है।”

वाइल्ड वेल कंट्रोल अमेरिका की एक कंपनी है, जो तेल और गैस उद्योग को कुआं नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया, दबाव नियंत्रण, राहत कुआं योजना और अन्य सेवाएं प्रदान करती है।

यह तेल या गैस कुआं नियंत्रण से संबंधित सभी प्रकार की घटनाओं को सुरक्षित रूप से रोकने और उनका समाधान करने में सेवाएं प्रदान करती है।

इस बीच, संयुक्त कलेक्टर ने कहा कि मोरी और इरुसुमंडा गांवों से विस्थापित हुए 450 से अधिक लोग अब अपने घरों को लौट सकते हैं या राहत केंद्रों में रह सकते हैं।

निशांती ने कहा कि ओएनजीसी जल्द ही यह निर्णय लेगी कि ‘मोरी-5’ कुएं का भविष्य में उपयोग करना है या इसे पूरी तरह बंद कर देना है, खासकर ऐसे समय में जब प्रभावित ग्रामीण तेल कंपनी के संचालन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

ओएनजीसी के अभियानों को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया और ‘‘ओएनजीसी वापस जाओ’’ के नारे लगाए।

भाषा प्रचेता सुरेश

सुरेश


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