अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ का पता लगाने के लिए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज

अंकिता भंडारी हत्याकांड में 'वीआईपी' का पता लगाने के लिए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज

अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ का पता लगाने के लिए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज
Modified Date: January 10, 2026 / 11:10 pm IST
Published Date: January 10, 2026 11:10 pm IST

देहरादून, 10 जनवरी (भाषा) अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड सरकार द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की सिफारिश किए जाने के बाद मामले में शामिल कथित ‘वीआईपी’ का पता लगाने के लिए पुलिस में एक प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है ।

पद्म भूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् अनिल प्रकाश जोशी द्वारा पुलिस महानिदेशक को दी गयी एक शिकायत के आधार पर यह प्राथमिकी देहरादून के वसंत विहार पुलिस थाने में दर्ज की गयी है ।

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि अगर यह प्राथमिकी अंकिता के माता-पिता की ओर से दर्ज करायी जाती तो ज्यादा अच्छा होता।

 ⁠

जोशी ने अपनी शिकायत में कहा है कि वर्तमान में प्रसारित खबरों, सोशल मीडिया पर उपलब्ध ऑडियो, वीडियो एवं प्रकरण के संबंध में आमजन में जारी चर्चाओं में ‘वीआईपी’ के रूप में संदर्भित कुछ अज्ञात व्यक्तियों पर अंकिता भंडारी हत्याकांड में संलिप्त होने का आरोप लगाया जा रहा है ।

शिकायत के अनुसार, अंकिता हत्याकांड में संलिप्त अपराधियों को सजा हो चुकी है लेकिन प्रकरण में आरोप लगाए जा रहे हैं कि साक्ष्यों को छुपाया अथवा नष्ट किया गया है ।

शिकायत में कहा गया है कि ‘वीआईपी’ बताए जा रहे अज्ञात व्यक्ति से संबंधित अपराध की जांच पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

जोशी ने शिकायत में कहा, ‘‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस शिकायत को प्राथमिकी के रूप में दर्ज करें एवं एक निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराएं।’’

शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 238, 249 और 45 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है ।

इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह प्राथमिकी अंकिता के माता-पिता की ओर से दर्ज होनी चाहिए थी ।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें पता चला है कि अंकिता हत्याकांड में ‘वीआईपी’ को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है जिसके बारे में पूरा उत्तराखंड जानना चाहता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस प्राथमिकी को दर्ज कराने में जिस व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है, वह बहुत सम्मानित व्यक्ति है लेकिन प्राथमिकी यदि उनके (अंकिता के) माता-पिता की तरफ से होती तो अच्छा होता।’’

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह को बुलाए और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से वैसी शिकायत तैयार कराई जाए, जैसी प्राथमिकी वह चाहते हैं।

रावत ने कहा कि यह प्राथमिकी अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह और माता सोनी देवी की ओर से होनी चाहिए ।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हत्याकांड की सीबीआई जांच की शुक्रवार को सिफारिश की थी । हालांकि, विपक्षी दल सीबीआई जांच को उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में कराए जाने पर अड़े हैं ।

इसी मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने रविवार को ‘उत्तराखंड बंद’ का आह्वान किया है ।

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता मामले की तटस्थ और ईमानदार जांच के लिए किए जा रहे प्रदेश बंद का कांग्रेस पार्टी पुरजोर तरीके से समर्थन करेगी ।

गढ़वाल के पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप ने कहा कि प्रदेश बंद के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।

उन्होंने कहा कि बाजारों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

स्वरूप ने सभी पक्षों से इस दौरान सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भड़काऊ पोस्ट साझा करने से बचने की भी अपील की है ।

भाषा दीप्ति सिम्मी

सिम्मी


लेखक के बारे में