डीजीपी की नियुक्ति के लिए कानून का, अन्यथा अदालत के मानदंडों का पालन करना होगा: उच्चतम न्यायालय

डीजीपी की नियुक्ति के लिए कानून का, अन्यथा अदालत के मानदंडों का पालन करना होगा: उच्चतम न्यायालय

डीजीपी की नियुक्ति के लिए कानून का, अन्यथा अदालत के मानदंडों का पालन करना होगा: उच्चतम न्यायालय
Modified Date: March 12, 2026 / 11:37 pm IST
Published Date: March 12, 2026 11:37 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि जिन राज्यों ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए अलग अधिनियम बनाया है, उन्हें उस कानून का पालन करना होगा, लेकिन यदि ऐसा कोई अधिनियम नहीं है, तो उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के खिलाफ शुरू की गई अवमानना ​​कार्यवाही को बंद कर दिया। इन राज्यों ने राज्य के डीजीपी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम सुझाने को लेकर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव भेज दिया था।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा यह स्पष्ट मत है कि जिन राज्यों में वैध अधिनियम लागू है, उन्हें डीजीपी की नियुक्ति में कानून का पालन करना होगा और जिन राज्यों में ऐसा अधिनियम नहीं है, उन्हें प्रकाश सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।” शीर्ष अदालत ने यह बात तब स्पष्ट की जब यह बताया गया कि झारखंड और उत्तर प्रदेश ने राज्य पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए अलग-अलग कानून बनाए हैं।

पुलिस सुधारों से संबंधित प्रकाश सिंह मामले में न्यायालय ने दिशानिर्देश निर्धारित किए थे, जिनके अनुसार डीजीपी का चयन यूपीएससी द्वारा सूचीबद्ध तीन सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से ही किया जाना अनिवार्य है और उनके लिए दो साल का निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया गया है।

झारखंड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणाभ चौधरी ने कहा कि राज्य ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक कानून बनाया है जिसमें कहा गया है कि आईपीएस अधिकारी का चयन उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि राज्य ने पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए नामों का सुझाव देने को लेकर यूपीएससी को एक प्रस्ताव भेजा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल राज्यसभा में डीजीपी भेजने में ज्यादा दिलचस्पी रखता है। उम्मीद है, अब उसे एक स्थायी डीजीपी मिल जाएगा क्योंकि राज्यसभा में कोई पद खाली नहीं है।’’

हाल में, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित किया है, साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी को भी नामित किया है, जो उच्चतम न्यायालय में राज्य का प्रतिनिधित्व करती हैं।

न्यायालय ने छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकारों से दो सप्ताह के भीतर डीजीपी की नियुक्ति पर जवाब मांगा है।

पांच फरवरी को, कई राज्यों द्वारा डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने में अत्यधिक देरी का गंभीर संज्ञान लेते हुए, न्यायालय ने यूपीएससी को ऐसे मामलों को उसके संज्ञान में लाने के लिए अधिकृत किया था।

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत


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