सशस्त्र उग्रवादियों ने मणिपुर के कामजोंग जिले में घरों को आग लगाई, निवासी घर-बार छोड़ कर भागे

सशस्त्र उग्रवादियों ने मणिपुर के कामजोंग जिले में घरों को आग लगाई, निवासी घर-बार छोड़ कर भागे

सशस्त्र उग्रवादियों ने मणिपुर के कामजोंग जिले में घरों को आग लगाई, निवासी घर-बार छोड़ कर भागे
Modified Date: May 7, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: May 7, 2026 9:57 pm IST

इंफाल, सात मई (भाषा) हथियारों से लैस उग्रवादियों ने बृहस्पतिवार तड़के भारत-म्यांमा सीमा के पास मणिपुर के कामजोंग जिले के गांवों पर हमला किया, घरों में आग लगा दी और निवासियों को भागने के लिए मजबूर कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार, उग्रवादियों ने तड़के करीब चार बजे कसोम खुल्लेन पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तांगखुल नगा गांवों — नामली, वांगली और चोरो पर हमला किया, जिसके कारण सीमावर्ती बस्तियों के निवासियों को पास के जंगलों में शरण लेनी पड़ी।

ये गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित हैं।

अधिकारियों ने बताया कि हमले के दौरान भागने की कोशिश में एक बुजुर्ग महिला घायल हो गई।

ग्रामीणों के अनुसार, नामली में दो घर, वांगली में तीन-चार घर और चोरो में एक चर्च को छोड़कर कई घर जलकर खाक हो गए।

बाद में असम राइफल्स सहित सुरक्षा बल स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचे।

फुंग्यार के विधायक एल. कीशिंग ने आरोप लगाया कि यह हमला सीमा पार से म्यांमा स्थित उग्रवादी समूहों कुकी नेशनल आर्मी (बर्मा) और पीपुल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ) द्वारा किया गया।

कीशिंग ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब तक राज्य में आंतरिक संघर्ष चल रहे थे, लेकिन आज बाहरी आक्रमण हुआ है। कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा और पीपुल्स डिफेंस फोर्स के संयुक्त बल ने चार-पांच सीमावर्ती गांवों पर हमला किया।’’

नगा पीपुल्स फ्रंट के विधायक ने दावा किया, ‘‘कई घर जलकर खाक हो गए, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ है। एक महिला समेत दो लोग लापता हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें सशस्त्र उग्रवादियों ने अगवा कर लिया है।’’

विधायक ने इसे ‘‘बाहरी आक्रमण’’ बताते हुए कहा कि राज्य और केंद्र सरकार, दोनों को इस मामले पर चुप नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इलाके में मणिपुर पुलिस की तैनाती नहीं है।’’

कीशिंग ने असम राइफल्स पर गांवों की सुरक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘असम राइफल्स के कर्मी कल गांवों में आए थे और आज हमला हुआ। ग्रामीणों ने घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है।’’

इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दावा किया कि सीमावर्ती गांवों पर हुआ हमला सीमा पार से किया गया हमला है जिसे म्यांमा से लगी सीमा के उस ओर के तत्वों द्वारा अंजाम दिया गया।

सिंह ने कहा, ‘‘हमारे स्वदेशी समुदाय लगातार बाहरी आक्रमण से उत्पन्न इस गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। जब तक इस मुद्दे को दृढ़ संकल्प और मजबूत सीमा सुरक्षा के साथ प्रभावी ढंग से हल नहीं किया जाता, हमारे राज्य में शांति बहाल नहीं हो पाएगी।’’

वहीं, तांगखुल अजे कटामनाओ लोंग (टीएकेएल), जिसे दक्षिणी तांगखुल छात्र संघ के नाम से भी जाना जाता है, ने कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा के तहत काम करने वाले कथित कुकी उग्रवादियों द्वारा तांगखुल नगा सीमावर्ती गांवों पर किये गए हमलों को लेकर रोष व्यक्त किया।

छात्र संघ ने आरोप लगाया कि लगभग 100 सशस्त्र उग्रवादी भारत-म्यांमा सीमा पार करके कामजोंग जिले में घुस आए तथा नामली, वांगली, अशंग खुल्लेन और चोरो सहित कई गांवों पर हमला किया।

इसने प्रभावित गांवों में मणिपुर पुलिस के कमांडो को तुरंत तैनात करने और कथित सुरक्षा चूक पर तत्काल स्पष्टीकरण जारी करने की राज्य सरकार से मांग की।

कई मेइती संगठनों के समूह, मणिपुर अखंडता समन्वय समिति (कोकोमी) ने भारत-म्यांमा सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है।

भाषा सुभाष माधव

माधव


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