सेना के जवानों को अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का असीमित अधिकार नहीं : न्यायालय

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सेना के जवानों को अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का असीमित अधिकार नहीं : न्यायालय

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 09:05 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 09:05 PM IST

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक अहम फैसले में कहा कि भारतीय वायुसेना के कर्मियों को असैन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का “असीमित अधिकार” नहीं है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि नौकरी छोड़ने के लिए पहले से मंजूरी लेना कोई मामूली औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, जिसे नजरअंदाज किया जा सके।

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि अभियानगत तैयारी बनाए रखने के लिए पहले से अनुमति लेने की वायुसेना की निर्धारित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का सख्ती से पालन किया जाना अनिवार्य है।

पीठ ने वायुसेना के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित आवश्यकताएं केवल औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं हैं, इसलिए उनपर अमल किया जाना जरूरी है।

फैसला लिखने वाला न्यायमूर्ति चंदुरकर ने कहा, ‘‘इन आवश्यकताओं को तय करने का मकसद भारतीय वायुसेना से वायु योद्धाओं को समय से पहले सेवा मुक्त होने से रोकने के उद्देश्य से सीधे जुड़ा हुआ है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि एयरमैन भारतीय वायुसेना के सदस्य हैं, जो एक अनुशासित बल है।’’

उन्होंने कहा, “असैन्य पद के लिए आवेदन करने से पहले अनुमति लेना और चयन के बाद सक्षम अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हासिल करना कोई मामूली प्रक्रियात्मक आवश्यकता नहीं है, जिसे संबंधित एयरमैन अपनी मर्जी से नजरअंदाज कर सके।”

पीठ ने भारतीय वायुसेना के कॉरपोरल नखत सिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक प्रोफेसर (हिंदी) के पद पर चुने जाने के बाद उन्हें एनओसी जारी किए जाने और सेवा से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया था।

वायुसेना में सात साल की सेवा पूरी करने वाले सिंह ने नवंबर 2020 में जारी भर्ती विज्ञापन के बाद एक असैन्य पद के लिए आवेदन किया था।

हालांकि, वह भर्ती परीक्षा और साक्षात्कार में सफल रहे थे, लेकिन एयर ऑफिसर कमांडिंग ने अक्टूबर 2022 में एनओसी जारी किए जाने और सेवा से मुक्त किए जाने का उनका आवेदन खारिज कर दिया था।

एयर ऑफिसर कमांडिंग ने वायुसेना के 2017 के आदेश का हवाला दिया था, जिसके तहत किसी एयरमैन के लिए असैन्य पद के लिए आवेदन करने से पहले सक्षम अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।

एयर ऑफिसर कमांडिंग के फैसले के खिलाफ सिंह की अर्जी सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) और दिल्ली उच्च न्यायालय दोनों ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया था।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश