सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप जारी किया

सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप जारी किया

सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप जारी किया
Modified Date: April 6, 2026 / 08:45 pm IST
Published Date: April 6, 2026 8:45 pm IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) और ‘लॉइटरिंग म्युनिशन’ (एलएम) के क्षेत्र में तकनीकी और परिचालन आवश्यकताओं को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण “प्रौद्योगिकी रोडमैप” सोमवार को जारी किया।

यह कदम विभिन्न संघर्षों में देखी जा रही युद्ध की बदलती प्रकृति के बीच उठाया गया है।

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि उद्योग और शिक्षा जगत के लिए तैयार किए गए लगभग 50 पन्नों के इस दस्तावेज में पांच श्रेणियों में वर्गीकृत 30 तरह के यूएएस और ‘लॉइटरिंग म्युनिशन’ के करीब 80 संस्करणों का ब्योरा दिया गया है।

‘लॉइटरिंग म्युनिशन’ हथियारों से लैस एक तरह का स्व-विनाशकारी मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) होता है, जिसे किसी इलाके में हवा में मंडराने और लक्ष्य की पहचान होने पर उससे टकराने और उसमें विस्फोट करने के लिए तैयार किया जाता है।

अधिकारी ने बताया कि रोडमैप में जिन श्रेणियों को शामिल किया गया है, उनमें निगरानी ड्रोन, ‘लॉइटरिंग म्युनिशन’, वायु रक्षा में भूमिका वाली मानवरहित हवाई प्रणाली, विशेष भूमिका वाली मानवरहित हवाई प्रणाली और रसद मानवरहित हवाई प्रणाली शामिल हैं।

सेना के उप प्रमुख (क्षमता विकास और रखरखाव) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने इस रोडमैप को जारी किए जाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में अपने संबोधन में दस्तावेज की संवेदनशील प्रकृति के बारे में चेताया। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे रोडमैप को अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा न करें, क्योंकि इससे उसके दुश्मन के हाथों में पड़ने का खतरा है।

सेना के डिजाइन ब्यूरो के एडीजी मेजर जनरल सी.एस. मान ने कहा कि यह पहली बार है, जब सेना ने यूएएस और ‘लॉइटरिंग म्युनिशन’ के क्षेत्र से संबंधित इस तरह के विनिर्देश साझा किए हैं, जो इन क्षमताओं को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाता है।

घटनाक्रम से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया कि इस रोडमैप को तैयार करने का काम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद शुरू हुआ था।

‘मानवरहित हवाई प्रणाली और लॉइटरिंग म्युनिशन के लिए भारतीय सेना का प्रौद्योगिकी रोडमैप’ शीर्षक वाला यह दस्तावेज नयी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में जारी किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि यह दस्तावेज उद्योग और शिक्षा जगत को यूएएस और ‘लॉइटरिंग म्युनिशन’ के क्षेत्र में सेना की दीर्घकालिक जरूरतों को लेकर स्पष्टता प्रदान करता है।

कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ड्रोन फेडरेशन इंडिया (डीएफआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम), फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की), रक्षा उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत


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