अनुच्छेद 370 : उमर ने ‘विरोधीभासी बयान’ पर भाजपा और उपराज्यपाल को आड़े हाथ लिया

अनुच्छेद 370 : उमर ने ‘विरोधीभासी बयान’ पर भाजपा और उपराज्यपाल को आड़े हाथ लिया

अनुच्छेद 370 : उमर ने ‘विरोधीभासी बयान’ पर भाजपा और उपराज्यपाल को आड़े हाथ लिया
Modified Date: September 20, 2023 / 10:30 pm IST
Published Date: September 20, 2023 10:30 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

जम्मू, 30 सितंबर (भाषा) नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार और उप राज्यपाल को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव और अनुच्छेद-370 को हटाने को लेकर ‘विरोधाभासी बयान देने’ और ‘भ्रमित करने वाली सूचना’ देने को लेकर आड़े हाथ लिया।

तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में दक्षिण कश्मीर के कोकेरनाग के जंगलों में सात दिनों तक चली मुठभेड़ और राजौरी और रियासी सहित शांतिपूर्ण क्षेत्रों में आतंकवादी गतिविधियों का प्रसार, केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति का सबूत है।

उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष केंद्र के रुख का जिक्र करते हुए उमर ने कहा,‘‘हम अजीब समय में रह रहे हैं जहां कोई नहीं जानता कि किस पर विश्वास किया जाए। उच्चतम न्यायालय में एक बात कही जाती है और उसके बाहर दूसरी बात।’’

अब्दुल्ला यहां पूर्व मंत्री अजय सधोत्रा और पूर्व विधान पार्षद (एमएलसी) सुरिंदर चौधरी को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिन्हें क्रमशः पार्टी के अतिरिक्त महासचिव और केंद्रीय सचिव के रूप में नामित किया गया था। समारोह की शुरुआत ‘गायत्री मंत्र’ के साथ-साथ कुरान की आयतों और गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ से हुई।

उमर ने कहा, ‘‘ 5 अगस्त, 2019 को जब अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया था, तब कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से एकीकृत नहीं था और इसलिए यह आवश्यक था। बाद में उच्चतम न्यायालय में शीर्ष सरकारी वकील ने पीठ को सूचित किया कि यह (अनुच्छेद 370 को निरस्त ) इसलिए किया गया क्योंकि जम्मू-कश्मीर के लोग खुद को (देश के बाकी हिस्सों से) अलग मानते थे और जम्मू-कश्मीर (अनुच्छेद 370 हटाने के बाद) पूरी तरह से देश के साथ एकीकृत हो गया।’’

उमर ने दावा किया कि उपराज्यपाल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक समारोह के दौरान कहा था कि वह तब तक जम्मू-कश्मीर में रहेंगे जब तक कि केंद्र शासित प्रदेश देश के साथ पूरी तरह से एकीकृत नहीं हो जाता।

उन्होंने कहा, ‘‘कौन सच बोल रहा है? या तो सरकार उच्चतम न्यायालय से झूठ बोल रही है या हमारे उप राज्यपाल ने भावनाओं में आकर उक्त बयान दिया है। दोनों सही नहीं हो सकते। अगर सरकार ने उच्चतम न्यायालय में गलत बयान दिया है तो यह अदालत की अवमानना है।’’

उमर ने श्रीनगर में उप राज्यपाल के एक अन्य कथित बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर में 80 प्रतिशत लोग चुनाव नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनका बयान सही साबित हुआ तो वह राजनीति छोड़ने और सिन्हा की ताजपोशी करने के लिए तैयार हैं।

अब्दुल्ला ने कहा कि उनका मानना है कि उपराज्यपाल को उनके आसपास के ‘चापलूसों’ ने गुमराह किया है और मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव के कारण वह उन्हें पहचान सकते हैं।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत


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