Asaduddin Owaisi on UCC: असम में UCC की आहट से शुरू हुई सियासत.. ओवैसी ने हिमंता सरकार को याद दिलाई ‘संविधान की प्रस्तावना’
Asaduddin Owaisi on Uniform Civil Code: असम में UCC पर सियासत तेज, ओवैसी ने भाजपा पर साधा निशाना, संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठाए सवाल।
Asaduddin Owaisi on Uniform Civil Code || Image- Investment Guru FILE
- असम चुनाव से पहले UCC पर सियासत तेज
- ओवैसी ने भाजपा पर संविधान विरोधी आरोप लगाए
- UCC को लेकर देशभर में बहस जारी
गुवाहाटी: असम में आसन्न विधानसभा चुनाव से पहले राजनितिक पार्टियों के घोषणाओं को लेकर सियासी लकीर खींच चुकी है। सत्तादल भाजपा ने राज्य में चुनाव जीतने पर समान नागरिक संहिता लागू करने का दावा किया है। भाजपा के मुताबिक उत्तराखंड में यह कानून सफलतापूर्वक लागू करने के बाद गुजरात विधानसभा में भी यह बिल पेश किया जा चुका है। (Asaduddin Owaisi on Uniform Civil Code) इस तरह यदि भाजपा असम में फिर से सरकार बनाने में कामयाब होती हैं तो घुसपैठियों को राज्य से बाहर करना और यूसीसी लागू करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
हालांकि एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने भाजपा सरकार को संविधान की याद दिलाते हुए साफ़ कहा है कि, सरकार यूसीसी के नाम पर हिन्दू कोड बिल लागू करना चाहती है जो कि, पूरी तरह असंवैधानिक हैं। ओवैसी ने कहा कि, संविधान के अनुसार धर्म की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है। प्रस्तावना में विचार की स्वतंत्रता, समानता और न्याय की बात कही गई है। यूसीसी के नाम पर हिंदू कोड बिल थोपने का प्रयास किया जा रहा है, जो गलत और असंवैधानिक है।”
#WATCH | Assam Elections 2026 | Guwahati: AIMIM chief Asaduddin Owaisi says, “…Freedom of religion is a fundamental right as per the Constitution. The preamble talks about Liberty of thought, equality and justice. The aim is to impose the Hindu Code Bill in the name of UCC,… pic.twitter.com/YHYnkHNM4t
— ANI (@ANI) April 2, 2026
समान नागरिक संहिता कानून क्या है?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) एक ऐसा कानून बनाने का प्रस्ताव है जिसमें देश के सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक ही नियम लागू हो, चाहे उनका धर्म या समुदाय कुछ भी हो। अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के अपने-अपने पर्सनल लॉ हैं, लेकिन UCC का उद्देश्य इन सबकी जगह एक समान कानून लागू करना है ताकि सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार मिल सके।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को यह प्रयास करने के लिए कहा गया है कि वह समान नागरिक संहिता लागू करे। इसका मुख्य उद्देश्य समानता, खासकर महिलाओं के लिए न्याय, और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है। हालांकि, इस पर बहस भी होती है क्योंकि कुछ लोग इसे जरूरी सुधार मानते हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप समझते हैं।
क्या है भाजपा के वादे?
सत्ताधारी भाजपा के वादों में समान नागरिक संहिता लागू करने के अलावा राज्य के बुनियादी ढांचे पर पांच लाख करोड़ रुपये खर्च करना, राज्य को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए 1,800 करोड़ रुपये का मिशन शुरू करना, युवाओं के लिए दो लाख सरकारी नौकरियां सृजित करना, 10 लाख उद्यमी बनाने की योजनाएं लागू करना और बालवाड़ी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करना शामिल है। (Asaduddin Owaisi on Uniform Civil Code) इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने कहा भाजपा 50,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा तैयार करेगी। ‘ओरुनोदोई’ योजना के तहत महिला लाभार्थियों को दी जाने वाली मासिक राशि 1,250 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करेगी, चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 500 रुपये करेगी और छोटे किसानों को 11,000 रुपये की वार्षिक सहायता प्रदान करेगी।
9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजें
गौरतलब है कि, असम में इस बार एक ही चरण में चुनाव संपन्न होगा। CEC के निर्वाचन कार्यक्रम के मुताबिक़ असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान नौ अप्रैल को होगा जबकि मतों की गिनती चार मई को होगी।
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