आसाराम को अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभालकर्ता रखने की अनुमति, फिलहाल अंतरिम जमानत नहीं

आसाराम को अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभालकर्ता रखने की अनुमति, फिलहाल अंतरिम जमानत नहीं

आसाराम को अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभालकर्ता रखने की अनुमति, फिलहाल अंतरिम जमानत नहीं
Modified Date: August 6, 2026 / 02:57 pm IST
Published Date: August 6, 2026 2:57 pm IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के 2013 के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू बाबा आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया लेकिन उसे चौबीसों घंटे सहायता के लिए अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभालकर्ता (केयरटेकर) रखने की अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत का अनुरोध करने वाली आसाराम की याचिका को लंबित रखा। पीठ ने उसे यह छूट दी कि स्वास्थ्य बिगड़ने पर वह मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध कर सकता है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आसाराम ने न्यायालय से यह तथ्य छिपाया कि उसके वकील ने पैरोल के लिए आवेदन किया था।

आसाराम के वकील ने कहा कि पैरोल के लिए आवेदन काफी पहले किया गया था और वह स्वास्थ्य आधार पर नहीं था।

इससे पहले, राजस्थान उच्च न्यायालय ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल देते हुए कहा था कि राज्य सरकार उसके पैरोल आवेदन को खारिज करने के अपने फैसले को उचित नहीं ठहरा सकी।

उच्च न्यायालय ने जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद 85 वर्षीय आसाराम को यह राहत जेल में बिताई गई अवधि और पहले अंतरिम रिहाई के दौरान उसके आचरण को ध्यान में रखते हुए दी थी।

उच्चतम न्यायालय को पहले बताया गया था कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों के अनुसार, आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है लेकिन उसे चौबीसों घंटे चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है।

शीर्ष अदालत ने 21 जुलाई को एम्स को आसाराम के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए एक चिकित्सा बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाबालिग से बलात्कार के 2013 के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उसे सुनाई गई उम्रकैद की सजा को 27 मई को बरकरार रखा था।

उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली आसाराम की याचिका पर 30 जून को राजस्थान सरकार से जवाब मांगा था।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने आसाराम को आंशिक राहत देते हुए उसे भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया था लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उसकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी।

उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 342 (गलत तरीके से रोककर रखना), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की गरिमा का अपमान) और 354(ए) (यौन उत्पीड़न) समेत कई अन्य प्रावधानों के तहत भी उसकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी। इसके अलावा पॉक्सो अधिनियम की धारा सात/आठ तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत भी उसकी दोषसिद्धि कायम रखी गई थी।

आसाराम को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के मामले में 25 अप्रैल 2018 को दोषी ठहराया गया था और भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की कई धाराओं के तहत उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

भाषा सिम्मी प्रशांत

प्रशांत


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