आसिया अंद्राबी और दो अन्य लोगों ने कश्मीर को अलग करने की साजिश रची थी: दिल्ली की अदालत
आसिया अंद्राबी और दो अन्य लोगों ने कश्मीर को अलग करने की साजिश रची थी: दिल्ली की अदालत
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि आसिया अंद्राबी और दो अन्य लोगों ने भारत से कश्मीर को अलग करने की साजिश रची थी।
अदालत ने एक आदेश में उन्हें (आसिया और दो अन्य आरोपियों को) राज्य के खिलाफ अपराध करने की साजिश रचने और यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन का सदस्य होने सहित कई अपराधों के लिए दोषी ठहराया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह ने बुधवार को अंद्राबी और उनकी दो साथियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को दोषी ठहराया था।
अदालत के 286 पन्नों के आदेश को बृहस्पतिवार को सार्वजनिक किया गया, जिसमें कहा गया, “आरोपियों ने भारत से कश्मीर को अवैध रूप से अलग करने के लिए साजिश रची थी।”
अदालत ने जिक्र किया कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण द्वारा प्रस्तुत वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखा रहा है कि उन्होंने बार-बार दावा किया कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा है और भारत के जबरन कब्जे में है।
अदालत ने कहा, “कश्मीर को भारतीय कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए ताकि वह पाकिस्तान का हिस्सा बन सके। रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री में ऐसे भाषणों के साथ-साथ सभी आरोपियों, विशेष रूप से आरोपी संख्या एक (अंद्राबी) के विभिन्न पोस्ट भी स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।”
अदालत ने कहा कि अंद्राबी ने अपने भाषणों व साक्षात्कारों में स्पष्ट रूप से वकालत की और पाकिस्तान से समर्थन मांगा ताकि यह दावा और प्रचार किया जा सके कि कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था।
अदालत ने कहा, “यह स्पष्ट है कि आरोपी केवल यह नहीं कह रही है कि कश्मीर विभाजन का एक अधूरा एजेंडा है, बल्कि उपरोक्त चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी इस पहलू का दुरुपयोग कश्मीर को भारत का हिस्सा न मानने के दावे का समर्थन, अनुमोदन और प्रचार करने के लिए कर रही है।”
अदालत ने यह भी कहा कि अंद्राबी द्वारा स्थापित संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ भारत के एक अभिन्न अंग को भारत से अलग करने से संबंधित गतिविधियों में “आत्मनिर्णय के अधिकार के दावे की आड़ में” शामिल था।
अदालत ने कहा कि आरोपियों ने धार्मिक पृष्ठभूमि पर आधारित दो राष्ट्र सिद्धांत के आधार पर भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन को बढ़ावा देने के लिए झूठी कहानियों को आगे बढ़ाया।
अदालत ने कहा, “आरोपियों का यह कहना था कि विभाजन हिंदुओं के लिए भूमि और मुसलमानों के लिए भूमि के आधार पर हुआ था। इसलिए लगभग 90 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले कश्मीर को पाकिस्तान में मिलना चाहिए। ”
अदालत ने बताया कि आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आधार पर आत्मनिर्णय का अधिकार है और कश्मीर पहले से ही पाकिस्तान का हिस्सा है तथा भारत ने इस पर अवैध कब्जा कर रखा है।
अदालत ने बुधवार को इन आरोपियों यूएपीए की धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या आतंकवादी संगठन का सदस्य होने पर दंड), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन करना) के तहत अपराधों का दोषी पाया।
अदालत ने तीनों को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए, 153 बी , 120 बी , 505 और 121 ए के तहत भी दोषी ठहराया।
अदालत ने अब सजा पर बहस सुनने के लिए मामले को 17 जनवरी को सूचीबद्ध किया है।
अंद्राबी और उसके दो साथियों पर फरवरी 2021 में यूएपीए और आईपीसी की कड़ी धाराओं के तहत कई अपराधों के लिए आरोपित किया गया था।
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश

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