असम के मुख्यमंत्री ने ‘वृंदावनी वस्त्र’ को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय की नींव रखी

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असम के मुख्यमंत्री ने ‘वृंदावनी वस्त्र’ को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय की नींव रखी

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  • Publish Date - February 22, 2026 / 07:37 PM IST,
    Updated On - February 22, 2026 / 07:37 PM IST

गुवाहाटी, 22 फरवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को ऐतिहासिक ‘वृंदावनी वस्त्र’ को प्रदर्शित करने के लिए एक संग्रहालय परिसर की नींव रखी और कहा कि उनकी सरकार राज्य की पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के मार्गदर्शन में निर्मित 16वीं शताब्दी के रेशमी वस्त्र को ब्रिटिश संग्रहालय 2027 के शुरू में 18 महीनों के लिए राज्य को देगा ताकि लोग इसे देख सकें।

शर्मा ने समारोह के बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘असम धीरे-धीरे अपनी गौरवशाली विरासत को पुनः प्राप्त कर रहा है… गुवाहाटी के केंद्र में, मैंने एक विश्वस्तरीय संग्रहालय की आधारशिला रखी, जिसमें इस पवित्र वस्त्र को रखा जाएगा।’’

उन्होंने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह कदम असम में ‘वृंदावनी वस्त्र’ को वापस लाने के प्रयासों में एक बड़ी छलांग है भले ही यह सीमित अवधि के लिए ही हो।

शर्मा ने कहा कि जब उन्होंने पदभार संभाला था तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें ‘विकास’ और ‘विरासत’ दोनों पर एक साथ काम करने की सलाह दी थी।

उन्होंने शंकरदेव को ‘गुरुजन’ कहकर संबोधित करते हुए कहा, ‘‘तब से हमारी सरकार दोनों मोर्चों पर अथक परिश्रम कर रही है। गुरुजन की कालजयी कृति की वापसी को अंतिम रूप देना इस दिशा में एक और बड़ा कदम है।’’

असम सरकार ने पिछले साल नवंबर में वृंदावनी वस्त्र के प्रदर्शन के लिए ब्रिटिश संग्रहालय के साथ एक समझौता किया था। यह पहली बार है कि एक सदी से भी अधिक समय पहले असम से बाहर ले जाए जाने के बाद इस वस्त्र का एक हिस्सा राज्य में प्रदर्शित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस वस्त्र को तिब्बत के रास्ते असम से ले जाया गया था जिसके प्रमुख टुकड़े वर्तमान में लंदन और पेरिस के संग्रहालयों में हैं तथा कुछ टुकड़े बोस्टन और लॉस एंजिलिस के संस्थानों में हैं।

भगवान कृष्ण के जीवन को दर्शाने वाला ‘वृंदावनी वस्त्र’ कोच राजा नर नारायण के अनुरोध पर बुना गया था और इसमें शंकरदेव द्वारा रचित श्लोक शामिल हैं।

यह कलाकृति लगभग साढ़े नौ मीटर लंबी है और इसमें रेशम के कई पैनल शामिल हैं जिन्हें बाद में जोड़ा गया था।

भाषा शोभना नेत्रपाल

नेत्रपाल