कोच्चि, दो अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस वर्ष मई में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास पर तलाशी के बाद एजेंसी के अधिकारियों पर हमले के एक आरोपी की जमानत याचिका का केरल उच्च न्यायालय में विरोध करते हुए कहा कि यह हमला ‘समन्वित और सुनियोजित’ था, न कि स्वतःस्फूर्त विरोध।
ईडी ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में कहा कि 27 मई को उसके अधिकारियों पर हुआ हमला सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना या अचानक हुए लोगों के विरोध के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह कई घंटे तक चली तलाशी की कार्रवाई पूरी होने के बाद हुआ था।
यह तलाशी पिनराई विजयन की पुत्री की कंपनी और एक रेत खनन कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले में की गई थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि विजयन की बेटी टी. वीना और उनकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को रेत खनन करने वाली कंपनी सीएमआरएल से 2017 और 2020 के बीच सूचना प्रौद्योगिकी और परामर्श सेवाओं के नाम पर धनराशि मिली, जबकि ये सेवाएं कथित तौर पर कभी प्रदान नहीं की गईं।
हालांकि, वीणा और सीएमआरएल ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार करते हुए कहा है कि ये भुगतान वैध व्यावसायिक व्यवस्था का हिस्सा थे।
तलाशी के बाद, जब ईडी अधिकारी वहां से निकल रहे थे, तो एक भीड़ ने उनकी गाड़ियों पर हमला कर दिया। आरोप है कि इस हमले में एक चालक, एक सीआरपीएफ अधिकारी और तलाशी टीम के एक सदस्य को चोटें आईं।
आरोपी की ज़मानत अर्जी का विरोध करते हुए वकील जयशंकर वी. नायर के जरिए दायर अपने हलफनामे में ईडी ने दावा किया है कि ‘आरोप एक केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर सुनियोजित और संगठित हमले की ओर इशारा करते हैं; इन अधिकारियों ने ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ के तहत मिली कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तलाशी की कार्रवाई की थी।’
ईडी ने कहा कि गैरकानूनी रूप से एकत्र हुई भीड़ का उद्देश्य केवल तलाशी का विरोध करना नहीं था, बल्कि वैध जांच में बाधा डालना, लोक सेवकों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोकना, जांच अधिकारियों को डराना-धमकाना और आपराधिक न्याय प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न करना था।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह ‘हिंसक, पूर्व नियोजित और राजनीतिक रूप से समन्वित हमला’ था, जिसमें खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश