पुलिस शिविर पर हमले ने असम की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किये : जितेंद्र सिंह

पुलिस शिविर पर हमले ने असम की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किये : जितेंद्र सिंह

पुलिस शिविर पर हमले ने असम की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किये : जितेंद्र सिंह
Modified Date: March 23, 2026 / 07:04 pm IST
Published Date: March 23, 2026 7:04 pm IST

गुवाहाटी, 23 मार्च (भाषा) कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह ने असम पुलिस के कमांडो शिविर पर उल्फा (आई) उग्रवादियों के हमले के बाद राज्य की आंतरिक सुरक्षा पर सोमवार को सवाल उठाये।

सिंह ने दावा किया कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ दल जब जनता से संपर्क करेंगे, तो जनता सरकार को जवाबदेह ठहराएगी।

सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “असम पुलिस कमांडो शिविर पर हमला एक खतरनाक मामला है। उग्रवादियों ने पुलिस पर हमला करने की हिम्मत दिखाई।”

शनिवार देर रात तिनसुकिया जिले के जगुन स्थित पुलिस कमांडो शिविर पर हुए उग्रवादी हमले में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। प्रतिबंधित संगठन उल्फा (आई) ने हमले की जिम्मेदारी ली है, जबकि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि हमलावरों को पकड़ने के लिए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

सिंह ने कहा कि इस हमले से राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

सिंह ने दावा किया, “दो साल पहले 15 अगस्त को राज्य में 22 बम बरामद हुए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा था कि हम कड़ी कार्रवाई करेंगे। अगर कार्रवाई की गई होती, तो यह हमला नहीं हुआ होता।”

सिंह ने पूर्वोत्तर राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “राज्य की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। अगर आप अपने ही राज्य की सुरक्षा नहीं कर सकते, उग्रवादियों से नहीं लड़ सकते, तो किस मुंह से चुनाव लड़ने और वोट मांगने जा रहे हैं?”

उन्होंने कहा, “आज सबसे बड़ा खतरा सुरक्षा का है, जो पूरी तरह से चरमरा गई है। सरकार अपने ही राज्य की रक्षा करने में विफल रही है।”

उन्होंने कहा कि जनता पिछले पांच वर्षों में सरकार के प्रदर्शन पर सवाल उठाएगी, और धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण की बात करने से कोई फायदा नहीं होगा।

सिंह ने कहा, “सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा। लोग अपने बच्चों के लिए रोजगार चाहते हैं, वे चाहते हैं कि परिवार का मासिक बजट नियंत्रण में रहे और कीमतें भी नियंत्रण में रहें।”

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


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