बीसीआई का राज्य बार काउंसिल को निर्देश: वकीलों के लिए सोशल मीडिया आचार संहिता लागू करें
बीसीआई का राज्य बार काउंसिल को निर्देश: वकीलों के लिए सोशल मीडिया आचार संहिता लागू करें
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) ने अपनी सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे सोशल मीडिया पर वकीलों के व्यवहार, डिजिटल नैतिकता, अदालत की गरिमा, गोपनीयता और पेशेवर जिम्मेदारी से जुड़े कड़े नियमों वाले उसके हालिया परिपत्र को तुरंत लागू करें।
बीसीआई ने यह चेतावनी भी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सत्रह जुलाई को सभी राज्य विधिज्ञ परिषदों के अध्यक्षों और सचिवों को भेजे गए एक पत्र में, बीसीआई ने कहा कि इस परिपत्र का वकीलों, लॉ फर्म, बार एसोसिएशन और कानूनी संस्थानों के बीच व्यापक रूप से प्रसार किया जाना चाहिए ताकि इसका सख्ती से पालन हो सके।
ये नियम वकीलों से सोशल मीडिया पर पेशेवर व्यवहार बनाए रखने के लिए कहते हैं और इस तरह के पोस्ट करने पर रोक लगाते हैं जो गुमराह करने वाले, मानहानि करने वाले या अदालतों के प्रति अनादरपूर्ण हों। ये मुवक्किल की गोपनीय जानकारी और प्रतिबंधित अदालती कार्यवाही का खुलासा करने पर भी रोक लगाते हैं।
वकीलों से यह भी कहा गया है कि वे डिजिटल मंचों पर भी अदालत की गरिमा को बनाए रखें, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार की गई सामग्री का गलत इस्तेमाल न करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी ऑनलाइन बातचीत कानूनी पेशे के नैतिक मानकों के मुताबिक हो।
बीसीआई ने कहा कि इसका मकसद तेजी से बढ़ते डिजिटल संचार के दौर में कानून के पेशे की गरिमा बनाए रखना और न्याय दिलाने की व्यवस्था में लोगों का भरोसा कायम रखना है।
परिपत्र में ‘डिजिटल स्पेस’ में वकीलों के पेशेवर आचरण को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक रूपरेखा दी गई है और यह दोहराया गया है कि सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय वकील नैतिक दायित्वों से आबद्ध रहते हैं।
बीसीआई ने सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया कि वे इन दिशानिर्देशों से अपने यहां पंजीकृत सभी वकीलों, सभी जिला और उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, लॉ फर्म और कानूनी संस्थानों को अवगत कराएं। साथ ही, यह भी कहा गया कि वे इस परिपत्र को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करें और नोटिस बोर्ड पर भी लगाएं।
इस निर्देश में राज्य विधिज्ञ परिषदों से यह भी कहा गया है कि वे वकीलों को नए नियमों के बारे में जानकारी देने और तय मानकों का स्वेच्छा से पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम, वेबिनार और कार्यशाला आयोजित करें।
भाषा सुभाष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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