सोनम वांगचुक ठीक हैं, लेकिन अस्पताल रिपोर्ट साझा नहीं कर रहा : पत्नी गीतांजलि आंग्मो
सोनम वांगचुक ठीक हैं, लेकिन अस्पताल रिपोर्ट साझा नहीं कर रहा : पत्नी गीतांजलि आंग्मो
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने शनिवार को दावा किया कि वांगचुक ‘पूरी तरह ठीक हैं’, लेकिन सफदरजंग अस्पताल बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उनकी मेडिकल रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध नहीं करा रहा है।
आंग्मो ने यह भी कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार होगा और वांगचुक भी उसमें हिस्सा लेंगे।
आंग्मो ने अस्पताल प्रशासन को लिखित रूप से कहा है कि उनकी अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को कोई भी दवा या चिकित्सकीय उपचार न दिया जाए।
उन्होंने अस्पताल में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देने की भी मांग की। वांगचुक को शनिवार सुबह भूख हड़ताल के 21वें दिन, जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लाया गया था।
उन्होंने अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए और कहा कि परिवार के लोगों को मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे ऐसा लग रहा है कि वे ‘जेल’ में हैं।
आंग्मो ने कहा कि डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर एक दिन पहले के 4.3 से घटकर 2.9 हो गया लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल ने मेडिकल रिपोर्ट साझा करने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने कहा,‘‘ कल सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने उनकी जांच की थी और सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक सामान्य थे। पोटैशियम 4.3 था। अब कहा जा रहा है कि यह 2.9 हो गया है और यह जानलेवा है। लेकिन जब हमने रिपोर्ट मांगी, तो उन्होंने केवल रिपोर्ट दिखाई, उसकी प्रति नहीं दी गई। पारदर्शिता की कमी के कारण हमें भरोसा नहीं हो रहा है।’’
आंग्मो ने कहा कि परिवार ने निर्णय लिया है कि किसी भी उपचार की अनुमति देने से पहले वांगचुक की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अस्पताल से कहा है कि उन्हें पोटैशियम या कोई अन्य दवा न दी जाए। पहले हम दूसरी लैब से जांच कराएंगे, उसके बाद ही कोई दवा दी जाएगी। सोनम बिल्कुल ठीक हैं और हम जल्द ही उन्हें ऐसे अस्पताल में ले जाएंगे, जिस पर हमें भरोसा हो।’’
आंग्मो ने सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को दो पत्र लिखे हैं जिसमें इनमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी अनुमति के बिना वांगचुक को न तो कोई दवा दी जाए और न ही नस के माध्यम से कोई दवा या तरल पदार्थ चढ़ाया जाए।
एक अन्य पत्र में उन्होंने पारदर्शिता की कमी और अस्पताल पर भरोसा नहीं होने का हवाला देते हुए वांगचुक को डिस्चार्ज कर परिवार की पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी।
भारी पुलिस तैनाती पर सवाल उठाते हुए आंग्मो ने कहा, ‘‘अगर यह सिर्फ चिकित्सकीय मामला है, तो अस्पताल में इतनी पुलिस क्यों तैनात है? हमें मोबाइल फोन अंदर क्यों नहीं ले जाने दिया जा रहा? ऐसा लग रहा है कि यह सफदरजंग अस्पताल नहीं, बल्कि सफदरजंग जेल है।’’
उन्होंने कहा कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने से आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा,‘‘ वह बिल्कुल ठीक हो जाएंगे और संसद मार्च में शामिल होंगे। युवाओं ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया है। अगर किसी कारण से सोनम मार्च में शामिल नहीं हो पाए, तो मैं उनकी ओर से सोमवार को इस मार्च का नेतृत्व करूंगी। उन्हें जबरन हटाकर आंदोलन को रोका नहीं जा सकता।’’
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जारी आंदोलन का जिक्र करते हुए आंग्मो ने कहा कि वांगचुक इसलिए इसमें शामिल हुए, क्योंकि उन्हें लगा कि मांगें वास्तविक हैं और यह पूरी तरह स्वत:स्फूर्त है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह आंदोलन एक मिसाल है। जेन ज़ी ने दिखा दिया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कैसे कर सकते हैं।’’
आंग्मो ने आरोप लगाया कि यह विवाद देश की संस्थागत व्यवस्था के व्यापक संकट को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘नीट परीक्षा का पेपर लीक केवल एक लक्षण है। पूरी व्यवस्था टूट चुकी है। यह सिर्फ पेपर लीक का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की अंतरात्मा को जगाने का प्रयास है। नागरिकों को अच्छी शिक्षा की मांग करनी होगी।’’
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए था।
वहीं, वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे डॉ. सतीश लांबा ने कहा कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल लाए जाने के बाद उन्हें उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के आधार पर शनिवार सुबह वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराया।
भाषा शोभना दिलीप
दिलीप

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