छात्रों का आचरण नियंत्रित करने का बीसीआई के पास अधिकार नहीं : उच्चतम न्यायालय

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छात्रों का आचरण नियंत्रित करने का बीसीआई के पास अधिकार नहीं : उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 04:50 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 04:50 PM IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और राज्य विधिज्ञ परिषदों के पास कानून के छात्रों का आचरण नियंत्रित करने की वैधानिक शक्ति नहीं है।

न्यायालय ने साथ ही कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना संबंधित शिक्षण संस्थान का अधिकार है और वह अपने नियमों के अनुसार इस संबंध में फैसला ले सकता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश हैदराबाद स्थित नालसार विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ बीसीआई की कार्रवाई से जुड़े विवाद की सुनवाई करते हुए दिया।

छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रधान न्यायाधीश के शामिल होने पर आपत्ति जताई थी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हमारी राय है कि अधिविक्ता अधिनियम, 1961, जिसके तहत बीसीआई को कानूनी तौर पर बनाया गया है, बीसीआई या किसी भी राज्य बार काउंसिल को विधि के छात्रों के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की कोई स्पष्ट या निहित शक्ति नहीं देता है।’’

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इस तरह की शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए, विधि स्नातक का उस अधिनियम के तहत वकील के तौर पर पंजीकरण होना ज़रूरी है। जहां तक छात्रों की बात है, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ उनके मूल संस्थान या उस संस्थान के नियमों/उप-नियमों के तहत तय प्राधिकार के पास ही होता है।’’

पीठ ने नालसार विवाद के संबंध में बीसीआई द्वारा जारी दोनों अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया। हालांकि, आलोचना के बाद बीसीआई ने दोनों अधिसूचनाएं जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर वापस ले ली थीं।

पीठ ने स्पष्ट किया कि छात्रों के वकील बनने और कानूनी पेशे के वैधानिक ढांचे के दायरे में आने से पहले बीसीआई उन पर नियामकीय नियंत्रण नहीं कर सकता।

पीठ ने कहा कि छात्रों के व्यवहार के लिए उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई करना संबंधित शिक्षण संस्थान का मामला है, जिस पर उसे अपने नियमों और विनियमों के तहत विचार करना है।

यह विवाद 14 अगस्त को उस समय शुरू हुआ था जब बीसीआई ने राज्य बार परिषदों को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक नालसार के 2026 बैच के स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण न किया जाए। यह कार्रवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के विश्वविद्यालय के प्रस्तावित दौरे के खिलाफ चलाए गए अभियान से जुड़े आरोपों के बाद की गई थी।

मामला उच्चतम न्यायालय में उठाए जाने पर प्रधान न्यायाधीश ने बीसीआई के हस्तक्षेप पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था, ‘‘यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है। वे (बीसीआई) हस्तक्षेप करने वाले कौन होते हैं? यह पूरी तरह अनावश्यक है।’’

सुनवाई के दौरान विधि छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने कहा कि बीसीआई अध्यक्ष के निर्देशों को वापस ले लिया गया है, लेकिन निर्देश जारी किए जाने के तरीकों की जांच की जरूरत है।

भाषा

वैभव नरेश

नरेश