बंगाल के मुख्यमंत्री चार अगस्त को एनसीपीआई सांसदों से मिलेंगे

बंगाल के मुख्यमंत्री चार अगस्त को एनसीपीआई सांसदों से मिलेंगे

बंगाल के मुख्यमंत्री चार अगस्त को एनसीपीआई सांसदों से मिलेंगे
Modified Date: August 3, 2026 / 06:57 pm IST
Published Date: August 3, 2026 6:57 pm IST

कोलकाता, तीन अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को नयी दिल्ली में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के 20 लोकसभा सदस्यों के साथ बैठक करेंगे। एनसीपीआई के राजग में शामिल होने के बाद दोनों पक्षों के बीच यह पहली औपचारिक बैठक होगी।

एनसीपीआई संसदीय दल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने बताया कि बैठक में मुख्य रूप से सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और चार मई को पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद कथित तौर पर विस्थापित हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के पुनर्वास के मुद्दे पर चर्चा होगी।

राज्य अतिथि गृह ‘बंग भवन’ में प्रस्तावित यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब पिछले सप्ताह भी दोनों पक्षों के बीच बैठक की संभावना थी, लेकिन वह नहीं हो सकी थी।

एनसीपीआई के भावी राजनीतिक कदम और भाजपा के साथ उसके संबंधों को लेकर जारी अटकलों के बीच इस बैठक पर पैनी नजर रहेगी।

बंदोपाध्याय ने कहा, ‘बैठक का एजेंडा हमारे संबंधित संसदीय क्षेत्रों का विकास है। सरकार बदलने के बाद हमारे पार्टी के कई कार्यकर्ता बेघर हो गए हैं। हम चाहते हैं कि उन्हें उनके घरों में वापस लाया जाए।’

एनसीपीआई के भविष्य को लेकर अटकलें जारी रहने के बीच, बंदोपाध्याय की बातों से संकेत मिलता है कि नेतृत्व इस बैठक को राजनीतिक गठजोड़ के बजाय कामकाज और प्रशासनिक तालमेल पर केंद्रित दिखाना चाहता है।

मंगलवार की बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही एनसीपीआई के सांसदों ने पहली बार राजग संसदीय दल की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक में हिस्सा लिया था। इससे केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ उनके बढ़ते जुड़ाव का संकेत मिलता है, जो पार्टी के राजग का हिस्सा बनने के फैसले के बाद हुआ है।

तृणमूल के 20 बागी लोकसभा सदस्यों ने इस साल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग होने के बाद एनसीपीआई का दामन थामा था।

हालांकि, वे अब संसद के भीतर राजग के सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं, फिर भी यह समूह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा उनके दल-बदल से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस द्वारा दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग को लेकर दायर की गई याचिकाएं भी शामिल हैं।’

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मंगलवार की बैठक से भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और एनसीपीआई सांसदों के बीच निर्वाचन क्षेत्र के विकास, संसदीय रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों पर तालमेल और मज़बूत होने की उम्मीद है।

यह बातचीत दल बदलकर अलग हुए सांसदों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की अधिकारी की लगातार कोशिशों को भी दिखाती है।

हालांकि, पिछले कुछ हफ़्तों में एनसीपीआई के भाजपा में विलय की खबरें बार-बार सामने आई हैं, लेकिन किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर यह संकेत नहीं दिया है कि इस तरह के कदम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

हालांकि, सुदीप बंदोपाध्याय ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ‘अभी’ ऐसे किसी मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है।

पिछले हफ़्ते दिल्ली में अधिकारी और एनसीपीआई सांसदों के बीच ऐसी ही एक बैठक होने की उम्मीद थी, लेकिन बिना किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के उसे टाल दिया गया था।

तब एनसीपीआई के सूत्रों ने संकेत दिया था कि चर्चा में सांसद निधि (एमपीलैड)के इस्तेमाल, विकास परियोजनाओं पर राज्य सरकार के साथ तालमेल और संसद के चल रहे मॉनसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर बात हो सकती है।

अधिकारी ने आठ जून को बागी सांसदों से तब मुलाकात की थी, जब तृणमूल संसदीय दल में फूट पड़ रही थी। हालांकि, जब से सांसद औपचारिक रूप से एनसीपीआई में शामिल हुए हैं और पार्टी राजग में शामिल हुई, तब से मुख्यमंत्री और संसदीय समूह के बीच कोई बैठक नहीं हुई है।

इसलिए, मंगलवार की बातचीत से यह साफ संकेत मिलने की उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार और उसके नए संसदीय सहयोगी आने वाले महीनों में अपने राजनीतिक और शासन संबंधी एजेंडे को तालमेल बिठाकर कैसे आगे बढ़ाएंगे।

भाषा राखी दिलीप

दिलीप


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