(सुदीप्तो चौधरी)
कोलकाता, 29 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल में पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच मुकाबला तेज हो गया है, जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी के परिवार के दबदबे और उनकी राजनीतिक निष्ठा में बदलाव क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनावी कारक बन गया है।
कभी इस क्षेत्र में वाम-विरोधी राजनीति का एक मजबूत स्तंभ रहा ‘अधिकारी परिवार’ तृणमूल कांग्रेस का एक स्तंभ बना और अब यह परिवार भाजपा के साथ जुड़ चुका है। इनमें शिशिर के बेटे एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद दिव्येंदु और वर्तमान में कांठी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सौमेंदु अधिकारी भी शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में तामलुक, कांठी (उत्तर) और कांठह (दक्षिण) निर्वाचन क्षेत्र में कांटे की टक्कर देखने को मिली थी, जब राजनीतिक निष्ठा और पिछले एक दशक में परिवार की राजनीतिक स्थिति में आए बदलाव के प्रभाव ने लोगों का ध्यान आकृष्ट किया था।
तटीय क्षेत्र में तामलुक विधानसभा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण निर्णायक सीट के रूप में उभरा है, जहां कांटे की टक्कर और तृणमूल कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के डॉ. सौमेन कुमार महापात्रा ने भाजपा के हरेकृष्ण बेरा को महज 793 वोट से हराकर सीट बरकरार रखी, जिसके बाद यह राज्य के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक बन गया। इस सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के गौतम पांडा भी मैदान में थे, लेकिन मुकाबला काफी हद तक द्विपक्षीय ही रहा।
हार-जीत के इस मामूली अंतर ने इस निर्वाचन क्षेत्र को राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण विधानसभा क्षेत्र का दर्जा दे दिया है। हालांकि, मतों के गणित से परे अधिकारी परिवार के दबदबे का असर साफ नजर आता है, जिसने तामलुक लोकसभा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाई हुई है।
कांग्रेस के समय में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विरोधी ताकत बनने से लेकर ग्रामीण बंगाल में ममता बनर्जी के उदय का एक प्रमुख स्तंभ बनने तक शिशिर अधिकारी के नेतृत्व में इस परिवार ने एक ठोस राजनीतिक नेटवर्क का निर्माण किया।
वर्ष 2021 के चुनाव से पहले यह समीकरण उस वक्त बदल गया, जब शुभेंदु भाजपा में शामिल हो गए, जिससे पूर्वी मेदिनीपुर में तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक आधार कमजोर हो गया और पार्टी को तेजी से एक प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में उभरने का मौका मिला।
आगामी चुनाव के लिए तृणमूल ने महापात्रा के स्थान पर दीपेंद्र नारायण रॉय को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने बेरा को फिर से नामांकित किया है। भाकपा ने नबेंदु घारा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अब तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।
कांठी (कोंताई) उपखंड में अधिकारी परिवार का दबदबा बना हुआ है और यह क्षेत्र की बदलती राजनीतिक गतिशीलता का स्पष्ट संकेत प्रदान करते हैं।
भाषा सुरभि सुरेश
सुरेश