बंगाल: हावड़ा स्टेशन क्षेत्र में अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत दुकानें हटाई गईं

बंगाल: हावड़ा स्टेशन क्षेत्र में अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत दुकानें हटाई गईं

बंगाल: हावड़ा स्टेशन क्षेत्र में अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत दुकानें हटाई गईं
Modified Date: May 17, 2026 / 12:31 pm IST
Published Date: May 17, 2026 12:31 pm IST

कोलकाता, 17 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के हावड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर गंगा घाट से स्टेशन परिसर तक फैले क्षेत्र में अस्थायी दुकानों और अवैध ढांचों को मध्यरात्रि के बाद अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत बुलडोजरों से ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), रेलवे अधिकारियों और हावड़ा नगर पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से चलाए गए इस अभियान के तहत अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी।

यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे द्वारा भूमि खाली कराने की पहल के तहत, बस स्टैंड और गंगा घाट क्षेत्र के पास फुटपाथ व सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा कर बनाई गयीं कई अस्थायी दुकानों और ढांचों को बुलडोजरों व भारी भरकम मशीनों की मदद से हटा दिया गया।

रेलवे ने हालांकि कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया लेकिन पूछे जाने पर अधिकारियों ने बताया कि यह नियमित अभियान का हिस्सा था।

कई वर्षों से अतिक्रमण के कारण स्टेशन पर यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।

हावड़ा स्टेशन देश के सबसे व्यस्त रेलवे टर्मिनल में से एक है।

मौके से प्राप्त तस्वीरों में पुलिस को इलाके के बड़े हिस्से में अवरोधक लगाते हुए और बुलडोजर के जरिये सड़क किनारे खाद्य पदार्थ, प्लास्टिक के सामान और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं वाली दुकानों को ध्वस्त करते हुए देखा जा सकता है।

कुछ फेरीवालों ने आरोप लगाया कि उन्हें अभियान शुरू करने से पहले पर्याप्त सूचना नहीं दी गई थी।

उनका कहना है कि इससे उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है।

कई व्यापारियों ने कहा कि कुछ दुकानें बरसों पुरानी हैं और उन्होंने अधिकारियों से पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की।

एक फेरीवाले ने कहा, “सौंदर्यीकरण और उचित प्रबंधन होना चाहिए लेकिन गरीब विक्रेताओं का पुनर्वास भी होना चाहिए।”

अभियान से प्रभावित एक अन्य दुकानदार ने कहा, “अगर पुनर्वास नहीं किया गया तो हमें आत्महत्या करनी पड़ेगी।”

भाषा जितेंद्र संतोष

संतोष


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