नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा उपनेता सागरिका घोष ने बुधवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है।
घोष ने बताया कि अधिकारियों ने ना तो प्राथमिकी को ऑनलाइन अपलोड किया है और ना आरोपियों को अनिवार्य नोटिस जारी किए हैं।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए घोष ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस को प्राथमिकी ऑनलाइन अपलोड करने का निर्देश दिया है ताकि आरोपी अपने खिलाफ लगे आरोपों को जान सके, लेकिन इस निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिकी को इस तरह अपलोड किया जाना चाहिए कि उन्हें स्पष्ट रूप से पढ़ा जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर इन्हें ऑनलाइन उपलब्ध नहीं करा रही है।
घोष ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों का भी हवाला दिया जिसके तहत सात साल से कम सजा वाले मामलों में आरोपी को नोटिस जारी करना आवश्यक होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अनिवार्यता का भी पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘ऑनलाइन प्राथमिकी अपलोड नहीं की जा रही हैं और नोटिस नहीं दिए जा रहे हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 और 2019 की घटनाओं से संबंधित मामलों को नयी शिकायतें दर्ज करके फिर से चालू किया जा रहा है।
घोष ने आरोप लगाया, ‘यह तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ एक साजिश है।’
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन से कोलकाता में पुलिस द्वारा की गई पूछताछ का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि वरिष्ठ सांसद को धक्का दिया गया जिससे वे गिर गए, फिर भी उन्हीं के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली गई।
उन्होंने कहा कि पुलिस का यह कथित दुरुपयोग तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर ‘राजनीतिक अत्याचार’ और उन्हें डराने-धमकाने के एक बड़े तंत्र का हिस्सा है।
भाषा सुमित नरेश
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