बेंगलुरु पुलिस ने अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए शुरू किया ‘ऑपरेशन मुक्त’

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बेंगलुरु पुलिस ने अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए शुरू किया ‘ऑपरेशन मुक्त’

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 01:05 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 01:05 PM IST

बेंगलुरु, आठ अगस्त (भाषा) ‘बेंगलुरु सिटी’ पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों में रह रहे संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए शनिवार को विशेष अभियान ‘ऑपरेशन मुक्त’ शुरू किया और ‘व्हाइटफील्ड डिवीजन’ में 30 से अधिक स्थानों एवं ‘इलेक्ट्रॉनिक सिटी’ इलाके में कई जगहों पर तलाशी अभियान संचालित किया।

व्हाइटफील्ड के पुलिस उपायुक्त सैदुल्ला अदावत ने बताया कि यह अभियान बेंगलुरु सिटी आयुक्त के निर्देश पर संचालित किया जा रहा है और इसमें अकेले व्हाइटफील्ड डिवीजन में 500 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘बेंगलुरु सिटी पुलिस आयुक्त के निर्देश पर पूरे शहर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। केवल व्हाइटफील्ड डिवीजन में ही 500 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी इस अभियान में शामिल हैं। यह वास्तव में एक निरंतर और नियमित प्रक्रिया है।’’

अधिकारी ने बताया कि सभी पुलिस थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 30 से अधिक स्थानों पर लोगों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमें कोई संदिग्ध लगता है तो हम उसके दस्तावेजों की जांच करेंगे और उसकी पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाएंगे।’’

पुलिस सूत्रों के अनुसार व्हाइटफील्ड, वरथुर, कडुगोडी, बालागेरे रोड, बेलंदूर, मराठाहल्ली, महादेवपुरा ,हेब्बागोडी, इलेक्ट्रॉनिक सिटी इलाकों में तलाशी ली गई। व्हाइटफील्ड के छह थाना क्षेत्रों के तहत करीब 30 स्थानों और इलेक्ट्रॉनिक सिटी में 15 से 20 स्थानों पर तलाशी ली गई।

पुलिस ने बताया कि व्हाइटफील्ड डिवीजन में करीब 40 संदिग्ध लोगों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए हिरासत में लिया गया। इनमें से चार लोगों की पहचान दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई है। अन्य लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी है।

डीसीपी ने कहा, ‘‘अगर हमें कोई पहचान पत्र या ऐसा दस्तावेज मिलता है जिससे पता चलता है कि व्यक्ति किसी दूसरे देश का नागरिक है तो हम इसकी जानकारी विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को देंगे। वहां से निर्वासन आदेश मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्हें उनके देशों में भेजा जाएगा।’’

पुलिस सूत्रों ने बताया कि झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों से आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र सहित पहचान और नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जिन लोगों के पास दस्तावेज नहीं मिले या जो संदिग्ध पाए गए, उन्हें आगे की पूछताछ के लिए थानों में ले जाया गया।

तलाशी अभियान के दौरान ऐसी अस्थायी बस्तियों की भी जांच की गई, जहां बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और नेपाल से आए लोग रह रहे हैं।

पुलिस ने कहा कि सत्यापन के बाद भारतीय नागरिकों को रहने दिया जाएगा, जबकि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए एफआरआरओ के समक्ष पेश किया जाएगा।

पुलिस को एक स्थान पर करीब 150 झोपड़ियां मिलीं, जबकि एक अन्य बस्ती में 100 से अधिक झोपड़ियां थीं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन झोपड़ियों को कथित तौर पर 2,000 से 3,000 रुपये प्रति माह के किराये पर दिया जा रहा था। पुलिस अब ऐसी जगह उपलब्ध कराने वाले मकान मालिकों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

हाल में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु में अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक की पहचान करने वाले डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने को लेकर शहर पुलिस को फटकार लगाई थी।

पुलिस ने उस अवैध प्रवासी की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने डॉक्टर-सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की आगे की जांच पर रोक लगा दी थी।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अवैध प्रवास की सूचना देने वालों पर कार्रवाई करके व्यवस्था को अवैध प्रवासन को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

भाषा शोभना सिम्मी

सिम्मी