भूपेंद्र यादव ने पोषक पुनर्चक्रण में गिद्धों की भूमिका सराही, संरक्षण में सहयोग की अपील की
भूपेंद्र यादव ने पोषक पुनर्चक्रण में गिद्धों की भूमिका सराही, संरक्षण में सहयोग की अपील की
(फाइल फोटो के साथ)
चंडीगढ़, छह सितंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को गिद्धों के लिए और अधिक सुरक्षित क्षेत्र बनाने तथा जंगल में उनकी आबादी को फिर से बढ़ाने में मदद के लिए तकनीकी क्षमता विकसित करने की अपील की।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री यादव ने पंचकूला में ‘अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस’ के मौके पर ‘संकट से उबरने की ओर: भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का उद्घाटन किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन और वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और ‘जटायु कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (पिंजौर)’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ वन अधिकारी, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक, चिड़ियाघर पेशेवर, संरक्षण विशेषज्ञ और अन्य संबंधित लोग एक मंच पर जुटे। इसका मकसद भारत में गिद्ध संरक्षण के लिए मिलकर किए जा रहे प्रयासों को मजबूत करना था।
यादव ने अपने संबोधन कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पर्यावरण संरक्षण का तरीका एक समग्र, पारिस्थितिकी तंत्र केंद्रित संरक्षण मॉडल पर आधारित है और यह किसी खास प्रजाति तक सीमित नहीं है।
मंत्री ने कहा कि यह तरीका अलग-अलग प्रजातियों के संरक्षण की पहल में साफ दिखता है, चाहे वह बाघ, शेर, ‘स्लॉथ बियर’, ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’, डॉल्फ़िन, घड़ियाल, जंगली भैंसा या गिद्ध हों।
उन्होंने बहुत अच्छे मृतभक्षी के तौर पर गिद्धों की अहम पारिस्थितिकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मृत जानवरों को तेजी से खाकर, गिद्ध पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया जलवायु परिवर्तन और मानव-जानवर के बीच टकराव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। 1990 के दशक से भारत में गिद्धों की आबादी में भारी गिरावट देखी गई है, जिसकी मुख्य वजह उनकी खाद्य-श्रृंखला में रुकावट और जानवरों के लिए इस्तेमाल होने वाली दर्द-निवारक दवाएं हैं जबकि इन जानवरों के मरने के बाद गिद्ध उन्हें खाते हैं।’’
मंत्री ने गिद्ध संरक्षण के लिए नीति निर्माण में ‘समग्र सरकार’ और ‘समग्र समाज’ के दृष्टिकोण के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने गिद्धों के लिए सुरक्षित पशुचिकित्सकीय तरीकों से सुरक्षित क्षेत्र बनाने, सुरक्षित भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जंगल में उनकी आबादी को फिर से बढ़ाने में मदद के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में लगातार कोशिशें करने की अपील की।
भाषा राजकुमार सुभाष
सुभाष

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